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होली 2022: इस मुहूर्त में ही आज होलिका दहन किया जाना शुभ और मंगलकारी, भूल कर भी न करें भद्रा के साए में पूजा 

Thu, 17 Mar 2022 12:37 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा (टिहरी)।
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा (टिहरी)। Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 17 Mar 2022 12:37 PM IST
सार

इस बार होलिका दहन का समय केवल 1 घंटा 10 मिनट ही मिल सकेगा। आज शाम पांच बजकर 19 मिनट से रातभर भद्रा का साया रहेगा। ऐसे में केवल शुभ मुहूर्त पर ही लोगों को होलिका दहन करना होगा। 

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Holi 2022: Holika Dahan will have to be done in auspicious Muhurta itself, there will be no shadow of Bhadra, see photos
देहरादून में होलिका दहन की तैयारी - फोटो : अमर उजाला

बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार होली इस बार 17 और 18 मार्च को मनाई जाएगी। आज होलिका दहन और कल शुक्रवार को रंगों की होली खेली जाएगी, लेकिन इस साल होलिका दहन के समय भद्रा का साया रहेगा। शास्त्रानुसार रात नौ बजकर पांच मिनट से 10 बजकर 15 मिनट तक निर्दोश मुहूर्त में ही होलिका दहन किया जाना शुभ और मंगलकारी होगा।

इस बार होलिका दहन का समय केवल एक घंटा 10 मिनट ही मिल सकेगा। आज 17 मार्च को होलिका दहन के दिन शाम पांच बजकर 19 मिनट से रातभर भद्रा का साया रहेगा। शास्त्रानुसार होलिका दहन पूर्णिमा की रात प्रदोष काल में किया जाता है, लेकिन प्रदोष काल में भी भद्रा का साया रहेगा। ऐेसे में भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन रात नौ बजकर पांच मिनट से सवा 10 बजे तक किया जा सकेगा।

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इस दौरान भद्रा का दोष नहीं रहेगा। दरअसल, भद्रा को विघ्नकारक और शुभ कार्य में निषेध माना जाता है। ऐसे में लोगों में होलिका दहन के समय को लेकर दुविधा है। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट ने बताया कि भद्रा काल में शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं। इसलिए 17 मार्च को रात 9 बजकर 5 मिनट से होलिका दहन का मुहूर्त है।

Holi 2022: Holika Dahan will have to be done in auspicious Muhurta itself, there will be no shadow of Bhadra, see photos
होलिका दहन - फोटो : अमर उजाला
होलिका की अग्नि में गाय का गोबर, गाय का घी और अन्य हवन सामग्री का दहन किया जाना चाहिए। पं. उदय शंकर भट्ट ने बताया कि होली के दौरान शराब और मांस का सेवन नहीं करने की सलाह दी है।
Holi 2022: Holika Dahan will have to be done in auspicious Muhurta itself, there will be no shadow of Bhadra, see photos
होलिका दहन - फोटो : अमर उजाला
भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि होलिका दहन का दिन ज्योतिष के हिसाब से बहुत ही खास होता है। कहा जाता है कि इस दिन रात्रि में होलिका को जलते हुए देखने के साथ-साथ यदि चंद्रमा के भी दर्शन किए जाए तो आने वाले पूरे वर्ष परिवार में अकाल मृत्यु नहीं होती है।
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Holi 2022: Holika Dahan will have to be done in auspicious Muhurta itself, there will be no shadow of Bhadra, see photos
होलिका दहन - फोटो : अमर उजाला
इस दिन यदि होलिका में पूजन के समय कपूर के साथ लाल फूल डाले जाएं तो कुंडली में अंगारक योग प्रभाव विहीन हो जाता है। यदि इस दिन माता सरस्वती का सात रंगों से श्रंगार किया जाए तो नीरस जीवन में बाहर आ जाती है। इस दिन यदि शंख में जल भरकर रात्रि में रख कर अगले दिन किसी बच्चे को दे तो वह मूक योग समाप्त कर देता है। जिससे बच्चा बोलने लगता है।
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हलिका दहन - फोटो : अमर उजाला
इस दिन शिवलिंग पर अबीर गुलाल के साथ चंदन का लेप लगाने से दरिद्रता दूर हो जाती है। उन्होंने बताया कि होलिका का दहन फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा के दिन किया जाता है। यदि भद्रा मुख काल में होली का दहन होता हे तो प्रदेश के राजा व प्रजा के लिए समय ठीक नहीं होता है। 
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