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अब इतिहासकार शेखर पाठक ने लौटाया पद्मश्री सम्मान

Tue, 03 Nov 2015 08:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 Nov 2015 08:24 AM IST
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historian shekhar pathak returned padma shri

प्रख्यात पर्यावरणविद् और इतिहासकार प्रो. शेखर पाठक ने देश में असहिष्णुता और उत्तराखंड में जल, जंगल, जमीन और खनन के मामलों में राज्य के हितों के विरुद्ध कार्य होने से आहत होकर पद्मश्री सम्मान लौटाने की घोषणा की है।

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नैनीताल फिल्म फेस्टिवल में अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान उन्होंने इसकी सार्वजनिक घोषणा की। इससे पूर्व पिथौरागढ़ डिग्री कालेज के प्रो. अजय शुक्ल डॉ. अंबेडकर फेलोशिप लौटा चुके हैं।
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प्रो. पाठक ने कहा कि देश में आज जैसा असहिष्णुता का माहौल है, ऐसा कभी नहीं था। उन्होंने एमएम कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और पानसरे का उदाहरण देते हुए कहा कि मात्र अपनी बात कहने पर इन लोगों को गोली मार दी गई या घरों में घुसकर गला काट दिया गया।

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कहा, देश में ऐसी असहिष्णुता कभी नहीं देखी

historian shekhar pathak returned padma shri

लेखकों और साहित्यकारों के खिलाफ ऐसी असहिष्णुता कभी नहीं देखी गई थी। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा प्रहार है जिसके गंभीर परिणाम होंगे।

प्रो. पाठक ने कहा कि उत्तराखंड में जल संसाधनों, भूमि, वन सहित खनिजों से स्थानीय नागरिकों का अधिकार छीनकर उन्हें बेदखल करने की प्रक्रिया सतत रूप से चल रही है।

कहा यह दुर्भाग्य की बात है कि हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड एकमात्र प्रदेश है, जहां किसी भी प्रदेश के व्यक्ति को चाहे जितनी भूमि खरीदने की छूट है। जबकि जम्मू कश्मीर, हिमाचल, सिक्किम सहित उत्तर पूर्वी राज्यों में अपने कानून हैं और कोई बाहरी व्यक्ति वहां भूमि नहीं खरीद सकता।

'बंद डब्बे में ही राष्ट्रपत‌ि को वापस कर दूंगा सम्मान'

historian shekhar pathak returned padma shri

इन तमाम स्थितियों के चलते राज्य और स्थानीय नागरिकों के हित बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। वे इस सबसे आहत हैं। उत्तराखंड को राज्य सहित कोई भी अन्य अधिकार लंबे संघर्ष के बाद ही मिला है। राज्य के जल संसाधन, वन सहित खनिज संपदा को ऐसे लुटता देखना पीड़ादायक है।

उन्होंने कहा कि प्राप्ति के बाद से उन्होंने अब तक पद्मश्री को खोला नहीं था। अब उसे बंद डब्बे में ही वे राष्ट्रपति को वापस कर देंगे। उन्होंने कहा कि जब साहित्यकारों ने अपने सम्मान लौटाने शुरू किए तो उन्होंने भी अपने मित्रों से सलाह की, तो दोस्तों ने कहा आपको साहित्य अकादमी ने पुरस्कृत नहीं किया है। अत: आप अभी शांत रहो। पर अब वे यह सम्मान वापसी की घोषणा करते हैं।

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