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'रियलिटी शो से कम हुई भारत-पाक की दूरियां'
योगेंद्र सिंह/ अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 29 Sep 2014 01:34 PM IST
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भारत-पाकिस्तान के संबंधों में तल्खी का सबसे बड़ा नुकसान हिंदी भाषा को हुआ है। 60 के दशक तक पाक के सभी स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती रही। उसके बाद से जैसे-जैसे दोनों देशों के संबंध बिगड़ते गए पढ़ाई का माध्यम उर्दू कर दिया गया।
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किसी स्कूल में नहीं पढ़ाई जाती हिंदी
24 सितंबर को कराची, उत्थल और बेला इलाके से 169 पाकिस्तानी हिंदुओं का एक जत्था बाघा बार्डर से होते हुए 26 सितंबर को हरिद्वार पहुंचा है। धार्मिक यात्रा पर पहुंचे यात्रियों ने रविवार को भूपतवाला स्थित जम्मू यात्री भवन में अमर उजाला से बात की।
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नानजी काशीराम और लालजी ने बताया कि 1960 के दशक में पाक के सभी स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती थी। लेकिन अब इसे किसी स्कूल में नहीं पढ़ाया जाता। शिवजी धावरी, हीना, सरस्वती, अनोसिया मराठा और भाणीबाई ने बताया कि पाक लोगों के दिलों में जो पहले कड़वाहट थी, हिंदी टीवी रियलिटी शो के चलने से काफी कम हुई है।
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लालजी नौरिया, गोमती, चंपा, कस्तूरी बाई और लीलाबाई ने बताया कि इन शो के माध्यम से दोनों देशों के लोग एक-दूसरे की सभ्यता और संस्कृति को समझने लगे हैं।
67 साल बाद मिले भाई-बहन
पाकिस्तान से आए धनराज ने बताया कि उनकी बुआ जनाबाई की शादी महाराष्ट्र में हुई थी। तब उनके पिता विष्णु शंकर जयदेव महज 10 साल के थे। उसी दौरान देश का बंटवारा हो गया।
इसके बाद कभी उनकी बुआ मायके नहीं आ पाई। पिता भी भारत नहीं आ पाए। धनराज ने बताया कि 2011 में वह अपने पिता को उनकी बहन से मिलाने महाराष्ट्र लेकर पहुंचे।
जब 67 साल बाद दोनों भाई-बहन मिले तो दोनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। धनराज ने बताया कि उनकी बुआ अब 95 और पिताजी 80 साल के हो चुके हैं।