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#हिंदीहैंहम: तीन दशक में हिंदी ने हासिल किया अलग मुकाम, बाजार के बड़े हिस्से पर भी काबिज

Mon, 14 Sep 2020 01:18 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 14 Sep 2020 01:18 PM IST
सार

  • अमर उजाला हिंदी हैं हम, अपराजिता वेबिनार में बोलीं विशेषज्ञ
  • तीन दशक में हिंदी की विभिन्न रूपों में आम जनता के बीच तक पहुंची
  • आधुनिक दौर में हिंदी को लेकर तैयार हुआ बाजार और रोजगार
     

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Hindi diwas 2020: Amar ujala hindi hain hum webinar in dehradun
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

इस बात में अब कोई शक नहीं रहा कि बीते तीन दशक में हिंदी ने अलग मुकाम हासिल किया है। आज हिंदी हर बोलचाल की भाषा होने के साथ ही बाजार के एक बड़े हिस्से पर भी काबिज है। हिंदी को लेकर शर्म करने या खुद को कमतर मानने का दौर तेजी से जा रहा है। हिंदी और अंग्रेजी के बीच अब टक्कर नहीं बल्कि समानता का दौर आगे आ रहा है। रविवार को अमर उजाला हिंदी हैं हम अभियान के तहत अपराजिता वेबिनार में शामिल हिंदी की विशेषज्ञों ने यह बात कही।

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एक समय था जब हिंदी को केवल साहित्य या मनोरंजन से जोड़कर देखा जाता था। आज हिंदी सिनेमा, न्यूज चैनल जैसे तमाम माध्यमों ने हिंदी को आमजन में प्रचलित किया है। डीएवी पीजी कॉलेज की डॉ. राखी उपाध्याय ने कहा कि निश्चित तौर पर विभिन्न माध्यम आने के बाद हिंदी को बढ़ावा मिला है। कल तक जो लोग केवल अंग्रेजी को ही सर्वोपरि भाषा मानते थे, आज वह हिंदी को भी बराबर की तवज्जो देने लगे हैं।
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गुरुकुल कांगड़ी विवि की प्रोफेसर सुचित्रा मलिक ने कहा कि हिंदी के सरलीकरण और बाजार ने इसे आम जन के बीच पहुंचाया है। निश्चित तौर पर हिंदी आगे बढ़ रही है। हिंदी पढ़ने वालों में ऐसे युवा भी तमाम हैं, जो कि 80 प्रतिशत अंकों के साथ विज्ञान की पढ़ाई करके हिंदी का रुख कर रहे हैं। जो कि हिंदी के संवर्धन के लिए एक अच्छा संकेत है। प्रदेश की पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सविता मोहन ने कहा कि हिंदी को बाजार ने एक अलग रुतबा दिया है। आज युवा वर्ग जितनी तेजी से हिंदी की ओर बढ़ रहा है, वह आने वाले समय में हिंदी को नए आयाम तक पहुंचाएगा।

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हिंदी का बढ़ता रुझान है अच्छा संकेत

मैंने बोर्ड का परीक्षा पिरणाम देखा तो हतोत्साहित हुई। हिंदी को लेकर हमारे बच्चों की नींव ही कमजोर है। उन्हें प्राथमिक या माध्यमिक स्तर पर ऐसी हिंदी नहीं पढ़ाई जाती कि वह इसे करियर के रूप में आगे लेकर जा सकें। हिंदी को आगे बढ़ाना है तो सबसे पहले प्राथमिक स्तर पर काम करना होगा। इसमें कोई दोराय नहीं है कि हिंदी ने अब अंग्रेजी से अलग अपनी पहचान बनाई है। आज हिंदी और अंग्रेजी वाले बच्चों के बीच टक्कर नहीं बल्कि समानता है। हिंदी रोजगार का जरिया बनने के बाद युवाओं का रुझान जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह अच्छा संकेत है। हालांकि हिंदी में अंग्रेजी शब्दों की मिलावट के साथ हिंगलिश का पनपना मैं अच्छा नहीं समझती। इससे आने वाले समय में हिंदी के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा होगा।
-डॉ. सुचित्रा मलिक, प्रोफेसर, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार

मल्टीनेशनल कंपनियों तक हुई हिंदी की पहुंच
एक दौर था जब हिंदी को केवल साहित्य से जोड़कर देखा जाता था। पिछले दो दशक में निश्चित तौर पर इसमें बड़ा बदलाव आया है। 20 वर्ष पहले और अब के हिंदी सिलेबस में बदलाव से यह तो साफ हो गया है कि बाजार में मांग बढ़ने से हिंदी का स्वरूप भी बदल रहा है। आज हिंदी न केवल सिनेमा जगत बल्कि मल्टीनेशनल कंपनियों तक भी मजबूत पकड़ बनाकर उभर रही है। हिंदी में रोजगार है। पिछले कुछ दशक में हिंदी का बाजार विकसित हुआ है। पहले यह लगता था कि हिंदी केवल साहित्य या मनोरंजन की भाषा है। तब नौकरी के अवसर नहीं होते थे, लेकिन जिस तरह से हिंदी सिनेमा का विकास हुआ, हिंदी मीडिया, हिंदी न्यूज चैनल आने के बाद काफी बदलाव आए हैं। आज कितना भी अंग्रेजी माहौल वाला दफ्तर हो, आपको हिंदी बोलने और पढ़ने वाले आसानी से मिल जाएंगे।
-डॉ. राखी उपाध्याय, प्रोफेसर, हिंदी विभाग, डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून

उत्तर से दक्षिण तक बढ़ रहा हिंदी का वर्चस्व
कोई भी भाषा तीन चीजों पर आगे बढ़ती है। राजनीति, धर्म और बाजार। हिंदी के पास आज तीनों चीजें हैं। राजनीति में हिंदी प्रदेश सबसे आगे चल रहे हैं। पूरी दुनिया के व्यापार का केंद्र हिंदुस्तान है। छोटी-मोटी चीज हर आदमी की पकड़ में है। बाजार ने हिंदी को बढ़ावा दिया है। कोई भी धर्म हो, सभी धर्म प्रचारक हिंदी भाषा के माध्यम से ही देश-विदेश में अपने प्रवचनों का प्रसार कर रहे हैं। जब से हिंदी आगे बढ़ी है, राजनीति ,धर्म के कारण ही आगे बढ़ी है। आज उत्तर से लेकर दक्षित तक हिंदी का वर्चस्व बनता जा रहा है। आने वाले समय में इससे हिंदी को और बढ़ावा मिलेगा।
-डॉ. सविता मोहन, पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक

वर्तनी पर पकड़ मजबूत करनी होगी

हिंदी आगे बढ़ रही है लेकिन हमें युवाओं में इसकी पकड़ मजबूत करनी होगी। आज इंटर कॉलेजों में अगर छात्रों से हिंदी में चार वाक्य भी लिखवा दो तो वर्तनी की अशुद्धियां मिलेंगी। एक सामान्य सी एप्लीकेशन भी वह गलतियों के बिना नहीं लिख सकते। बुनियाद कमजोर हो रही है। प्राथमिक स्तर पर हिंदी को लेकर उतना काम न हीं हो रहा है। इस वजह से बच्चे नौंवी कक्षा के बाद हिंदी को केवल एक पासिंग विषय के तौर पर देखने लगते हैं। उनकी कक्षा आगे बढ़ने के साथ ही हिंदी उनके सिलेबस से दूर हटती चली जाती है। हिंदी के प्रति रूचि पैदा तभी होगी जबकि हम शुरुआत स्तर पर ही इस दिशा में काम करेंगे।
-मंजू बडोला, पूर्व हिंदी शिक्षिका, हरिचंद गुप्ता आदर्श कन्या इंटर कॉलेज, ऋषिकेश 

आईटी सेक्टर में हिंदी को प्रोत्साहन की जरूरत
वैसे तो हिंदी का प्रचलन काफी बढ़ा है, लेकिन आईटी सेक्टर में आज भी हिंदी को प्रोत्साहन की जरूरत है। वेबिनार में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आईटी में भी हिंदी के लिए काम हो। दूसरी ओर विशेषज्ञों का यह भी कहना था कि अंग्रेजी से हिंदी को कोई खतरा नहीं है। हिंदी ही ऐसी भाषा है, जिसकी पाचन शक्ति हर भाषा को पचाने की है।

हिंदी का सरलीकरण और देगा ऑक्सीजन
हिंदी भाषा के शब्दों का सरलीकरण आज का बड़ा मुद्दा होना चाहिए। वेबिनार में इस बात पर भी विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जिस भाषा के शब्द आसान होंगे, वह उतना ही बेहतर तरीके से अपनी जगह बनाएगी। हिंदी को भी ऐसे ही सरलीकरण की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना था कि हिंदी समाचार पत्र हों या समाचार चैनल, अगर कहीं सरल शब्द इस्तेमाल नहीं होंगे तो वह पाठकों या दर्शकों के बीच पैठ नहीं बना पाएंगे।

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