‘भारत में लंदन जैसा हो गया हिंदी का हाल'
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लंदन में हम हिंदी का अस्तित्व बनाने की जंग लड़ रहे हैं। लेकिन भारत आकर देखते हैं तो यहां भी हिंदी की हालत लंदन जैसी है। हम बच्चों को सिर्फ इंग्लिश पढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
मातृभाषा हिंदी दूर होती जा रही है। यह टिप्पणी मंगलवार को लंदन से दून पहुंची ब्रिटिश विधायक और हिंदी साहित्यकार जकिया जुबैरी ने केंद्रीय विद्यालय-1 हाथीबड़कला में व्याख्यान के दौरान की।
लेबर पार्टी की विधायक जुबैरी ने कहा कि लंदन में ‘कथा यूके’ संस्था हर साल भारत के श्रेष्ठ हिंदी साहित्य लेखक को सम्मानित करती है। हम हिंदी साहित्य को कैंब्रिज विवि तक पहुंचा रहे हैं। कोशिश न सिर्फ भारतीय मूल बल्कि ब्रिटिश मूल के बच्चों के बीच भी हिंदी पहुंचाने की है।
जुबैरी ने राज्यों में राज्य भाषा को प्रथम, हिंदी को द्वितीय भाषा घोषित करने पर भी दुख जताया। जकिया लंदन में लेबर पार्टी से लगातार चौथा चुनाव जीतकर विधायक (बरो) हैं।
अखरता है प्रवासी साहित्यकार कहलाना
जकिया ने कहा कि वह लंदन में हिंदी के लिए काम करती हैं तो उन्हें निवासी होने के बावजूद प्रवासी साहित्यकार पुकारा जाता है। जकिया का कहानी संग्रह ‘सांकल’ हाल में राजकमल प्रकाशन ने छापा है।
गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में उनकी किताब एमए में पढ़ाई जा रही है। डॉ. अंबेडकर विवि की छात्रा पूजा प्रजापति उन पर एमफिल कर रही हैं।
जुबैरी ने बच्चों को बताया कि कैसे लंदन के नियमों के हिसाब से वह छींक और आंसुओं पर काबू पा सकते हैं। केवि देखकर कहा कि यह ब्रिटिश स्कूल जैसा है। बच्चों में अनुशासन, छोटे बाल, साफ यूनिफॉर्म दिखाई देती है।
छुट्टी मनाने पाक गई, वहीं हो गई शादी
बकौल जकिया, मेरा जन्म यूपी के आजमगढ़ जिले में हुआ। शिक्षा इलाहाबाद और बनारस हिंदू विवि से हुई। बंटवारे के समय ज्यादातर भाई-बहन पाकिस्तान चले गए। वे चाहते थे कि मैं भी पाक आ जाऊं। इस बीच छुट्टियां मनाने एक बार पाकिस्तान गईं तो वहीं शादी कर दी गई।
मन पाकिस्तान में नहीं लगा। वर्ष 1977 में पति का तबादला लंदन हुआ तो भारत लौटने की आस जगी। ब्रिटिश नागरिकता के बाद काम शुरू किया और हिंदुस्तान आने-जाने लगी। लंदन में कहानीकार तेजेंद्र शर्मा आदि के साथ हिंदी के प्रसार के लिए काम कर रही हूं।