Himalaya Diwas 2020: हिमालयी क्षेत्र में इंसानी दखल से खतरा, गंगोत्री से गोमुख तक मिला कई क्विंटल कूड़ा
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हिमालयी क्षेत्र में इंसानी दखल से किस तरह प्रदूषण फैल रहा है। इसकी एक बानगी एक वर्ष पूर्व आईआईटी के छात्रों के दल द्वारा गंगोत्री से गोमुख और तपोवन तक चलाए गए सफाई अभियान के दौरान देखने को मिली थी। इस दौरान छात्रों ने 40 बोरों में कूड़ा एकत्र किया।
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केंद्र सरकार के नमामि गंगे एवं जल शक्ति मंत्रालय के प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी के हिमालयन एक्सप्लोरर क्लब (एचईसी) के छात्रों के ट्रेकिंग दल ने 19 सितंबर को गंगोत्री, गोमुख और तपोवन तक पैदल यात्रा कर सफाई अभियान चलाया था। इस दौरान छात्रों ने भारी मात्रा में गोमुख, भोजवासा कैंप क्षेत्र, तपोवन और चीरबासा से कूड़ा एकत्र किया।
जगह-जगह लोगों ने पत्थरों के बीच खाने-पीने के सामान के पैकेट, पॉलिथीन, कपड़े, बिस्किट व टॉफी आदि के रैपर डाले थे। लौटते समय छात्रों ने करीब 40 बोरों में 1200 किलो से अधिक कूड़े को गंगोत्री लाकर इसके निस्तारण के लिए नगर पंचायत प्रशासन के सुपुर्द किया।
चिंताजनक यह रहा कि यहां एकत्र किए गए कूड़े से 2008 की एक्सपायरी डेट के बिस्किट के रैपर भी मिले थे। इससे पता चलता है कि यहां दस सालों से ज्यादा पुराना कूड़ा जमा है। जो ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का बड़ा कारण है।
गोमुख में जलाए गए कूड़े से कूड़ेदान के पेंट तक पिघले
आईआईटी रुड़की छात्रों के अभियान के दौरान यह भी देखने को मिला था कि गोमुख के पास रखे गए लोहे के बने कूड़ेदान का पेंट आग की तपिश से काला पड़ा था, जो इस बात की ओर संकेत कर रहा था कि इस कूड़े को यहीं पर जलाया जा रहा है।
कूड़े को जलाना जहां प्रदूषण के लिहाज से बेहद हानिकारक है, वहीं प्रदूषण मानकों का भी उल्लंघन है, लेकिन गोमुख के पास का जो नजारा देखने को मिला, वह चिंताजनक था। गोमुख से कुछ दूर पहले दो कूड़ेदान रखे मिले। इन पर लाल और हरे रंग का पेंट किया गया है, लेकिन जब कूड़ेदान में झांककर देखा तो उसमें जला हुआ कूड़ा मिला।
आग के कारण एक कूड़ेदान का पेंट पूरी तरह से पिघलकर मिट चुका था जबकि दूसरे कूड़ेदान का आधा हिस्से का पेंट भी पिघला हुआ था। इससे साफ हो रहा था कि गोमुख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी कूड़े का निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
आईआईटी रुड़की का हिमालयन एक्सप्लोरर क्लब हर साल छात्रों को हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग के लिए भेजता है। पिछले साल ट्रेकिंग के साथ सफाई अभियान का छात्रों का प्रयास सराहनीय रहा है। इस दौरान गोमुख क्षेत्र से छात्रों ने कई क्विंटल कूड़ा भी एकत्र किया था। इस अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि हिमालयी क्षेत्र में कूड़ा मुक्त करने के साथ ही आम लोगों को भी जागरूक किया जा सके।
-प्रो. एम परीदा, उपनिदेशक आईआईटी रुड़की