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हिमालयन माउंटेन होम में पहाड़ी लोक संस्कृति से रूबरू होंगे पर्यटक
विनोद नौटियाल, अमर उजाला, ऊखीमठ
Updated Tue, 15 May 2018 02:33 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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ऊखीमठ किमाणा गांव स्थित हिमालय माउंटेन होम में देश-विदेश के पर्यटकों को प्रकृति, पहाड़, पर्यावरण और पारंपरिक लोक संस्कृति से रूबरू कराया जाएगा।
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पारंपरिक शैली के बने घरों में होम स्टे के जरिए जहां किसान नर्सरी, वानिकी को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। 18 मई को यहां बंगलूरू से पहला दल रात्रि प्रवास के लिए पहुंचेगा। यहां ठहरने के लिए पर्यटक ऑन लाइन बुकिंग कर सकते हैं। तहसील मुख्यालय से करीब 5 किमी की दूरी पर स्थित किमाणा गांव के डा. कैलाश पुष्पवाण ने गांव में होम स्टे शुरू किया है।
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पुराने घर की पहाड़ी शैली में साज-सज्जा के साथ व्यवस्थित कर उसे पर्यटकों के ठहरने लायक बनाया है। साथ ही भविष्य को देखते हुए गांव में अन्य पांच भवनों का भी चयन किया गया है, जिन्हें होम स्टे के लिए तैयार किया जाना है। डा. पुष्पवाण ने बताया कि पहाड़ की परंपराओं, लोक संस्कृति और अस्तित्व को बचाने के लिए इस तरह के प्रयास कारगर हो सकते हैं। कहा कि आने वाले दिनों में पर्यटकों को घुड़सवारी की सुविधा भी दी जाएगी।
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पहाड़ी व्यंजन का लेंगे स्वाद
uttarakhand
हिमालयन माउंटेन होम स्टे में ठहरने वाले पर्यटकों को पहाड़ी व्यंजन परोसे जाएंगे। यहां मंडुवे की रोटी, झिंगोरे की खीर, काली दाल व भट्ट का चैसा, गहथ का फाणू, कफलू, कंडाली की सब्जी, लाल चावल का भात, भटवाणी, थिचौंणी, काली दाल की पकोड़ी व पूरी परोसी जाएगी।
पुस्तकों के साथ गायन, पेंटिंग का भी लें आनंद
हिमालयन होम स्टे में पहाड़ और उत्तराखंड सहित विभिन्न विषयों की 400 किताबें रखी गई हैं। साथ ही चित्रकारी, गायन, लोक नृत्य, वाद्य यंत्र आदि की सुविधा उपलब्ध है।
यहां समय-समय पर लोक परंपराओं पर आधारित पांडव लीला, जीत बगड्वाल सहित थड्या, चौंफला, झूमेलो नृत्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पुस्तकों के साथ गायन, पेंटिंग का भी लें आनंद
हिमालयन होम स्टे में पहाड़ और उत्तराखंड सहित विभिन्न विषयों की 400 किताबें रखी गई हैं। साथ ही चित्रकारी, गायन, लोक नृत्य, वाद्य यंत्र आदि की सुविधा उपलब्ध है।
यहां समय-समय पर लोक परंपराओं पर आधारित पांडव लीला, जीत बगड्वाल सहित थड्या, चौंफला, झूमेलो नृत्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।