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आहिस्ता-आहिस्ता बदल रहा पहाड़ का मौसम, महसूस हुए जलवायु में बदलाव के संकेत
Fri, 18 Jan 2019 02:03 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
अविकल थपलियाल, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 18 Jan 2019 02:03 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बीते पांच साल में उत्तराखंड के मौसम में आए बदलाव को वैज्ञानिक ही, नहीं राज्य के निवासी भी शिद्दत से महसूस कर रहे हैं। राज्य की जलवायु में आ रहे बदलाव पर मानव विकास संस्था की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
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संस्था ने जलवायु परिवर्तन पर किए सर्वे में लोगों के मन की थाह ली। प्रदेश के सभी 13 जिलों में किए गए सर्वे में 40 फीसदी लोगों ने माना कि प्रदेश की जलवायु में काफी परिवर्तन आया है। सर्वे में औद्योगिकीकरण, वृक्षों के कटान, जंगल की आग, नगरीकरण के अलावा अवैध खनन को जलवायु परिवर्तन की मुख्य वजह माना गया है।
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प्रदेश के नियोजन और अर्थ संख्या विभाग ने एक निजी संस्था इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन डेवलपमेंट से यह सर्वे कराया है। इस सर्वे में उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जिले के 60 प्रतिशत लोगों ने माना कि बीते पांच साल में प्रदेश के मौसम में जबर्दस्त बदलाव आया है। पौड़ी में सबसे कम सिर्फ 13 फीसदी लोगों ने ही जलवायु परिवर्तन की बात स्वीकारी। राज्य के दो मैदानी जिले हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी लगभग 40 फीसदी लोगों ने बदलाव को प्रमुखता से रेखांकित किया। इस सर्वे में लोगों से जलवायु परिवर्तन के कारणों पर भी पूछा गया।
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रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक 57.9 फीसदी लोगों ने वृक्षों के कटान को सबसे अहम कारण माना। 37.6 प्रतिशत लोगों ने बढ़ते उद्योगों से फैल रहे प्रदूषण को वजह माना। नगरीकरण में आई तेजी को 36.4 फीसदी लोगों कारण माना। 67 प्रतिशत वन भू-भाग वाले उत्तराखंड में जंगल की आग भी प्रमुख मुद्दा रहा है। 20.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि जंगल की आग का भी राज्य के बिगड़ते मौसम में योगदान रहा है।
पहाड़ों और नदियों में हो रहे अवैध खनन को 08.7 इसकी वजह बताया। तीन फीसदी लोगों ने प्रतिशत ने मौसम में बदलाव के अन्य कारण गिनाए। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में भूस्खलन, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। 2013 की केदारधाम आपदा के बाद मौसम में आए बदलाव पर आई यह रिपोर्ट भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा रही है।
हिमालयी क्षेत्र अन्य जगहों के मुकाबले अधिक संवेदनशील है। जलवायु परिवर्तन के कारणों की तलाश के साथ समाधान पर भी ध्यान देना होगा। जनता को जागरूक करने के अलावा पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखकर ही विकास कार्य जमीन पर उतारने चाहिए। जलवायु परिवर्तन अन्तरराष्ट्रीय चिंता का मुद्दा बन चुका है।
- आरएन झा, मुख्य वन संरक्षक, जलवायु परिवर्तन
सर्वे में इतने लोगों ने स्वीकारा जलवायु में बदलाव
जिला प्रतिशत
अल्मोड़ा - 28.4
बागेश्वर - 52.4
चमोली- 64.7
चम्पावत- 49.5
देहरादून- 29.7
पौड़ी - 12.9
नैनीताल- 59.7
हरिद्वार- 43.1
पिथौरागढ़- 39.5
रुद्रप्रयाग- 53.3
टिहरी - 19.2
यूएस नगर- 37.9
उत्तरकाशी- 62.7
कुल औसत 38.9
ये सामने आए जलवायु परिवर्तन के कुप्रभाव
-सिकुड़ते ग्लेशियर
-स्नो लाइन का ऊपर खिसकना
-प्राकृतिक जल स्रोतों का खत्म होना
-अनियमित वर्षा
-फसल बोने के समय में परिवर्तन
-असमय फूलों का खिलना
-एप्पल जोन में परिवर्तन
-तापमान और बाढ़ में बढ़ोतरी
-जैव विविधता पर असर