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उत्तराखंड के इन जिलों की यह हकीकत को जानेंगे तो दंग रह जाएंगे

Sat, 24 Feb 2018 02:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून। Updated Sat, 24 Feb 2018 02:24 PM IST
सार

-इन जनपदों के लोग सबसे गरीब
-देहरादून में सबसे कम
-पलायन की पीढ़ा बढ़ी

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Highest poverty in Uttarkashi
uttarakhand village

विस्तार

सूबे की सत्ता पर काबिज रहे सियासी दल और उनके हुक्मरान उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों की इस हकीकत को जानेंगे तो समझ जाएंगे कि पहाड़ की राजधानी की पहाड़ में बनाए जाने की मांग क्यों हो रही है। राज्य गठन के 17 साल बाद भी यह तथ्य उभर कर सामने आया है कि पर्वतीय जनपदों की तुलना में अस्थायी राजधानी देहरादून में समृद्धि का ग्राफ काफी तेजी से बढ़ा। लेकिन उत्तरकाशी और चमोली सरीखे सीमांत जनपदों में गरीबी का स्तर चिंताजनक स्थिति में है।   
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सच तो यह है कि उत्तराखंड के पर्वतीय भूभाग के हालातों में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है। प्रदेश के मैदानी और शहरी जनपदों की तुलना में वहां के लोग ज्यादा गरीब हैं और खुशाल जिंदगी की तलाश में गांव छोड़ रहे हैं। यह तस्वीर हाल ही में आए एक अध्ययन से उजागर हुई है। अध्ययन की रोशनी में जो तस्वीर दिखाई दे रही है, वह सचमुच पहाड़ और मैदान और शहर और गांव के बीच विकास की गहरी और चौड़ी होती जा रही खाई को बयान कर रहे हैं।
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इन जनपदों के लोग सबसे गरीब
अर्थ एवं संख्या विभाग के तहत गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के अध्ययन से पता चलता है कि प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में ज्यादा गरीबी है।
उत्तरकाशी जनपद में सर्वाधिक 80 फीसदी परिवार ऐसे हैं जिनमें सबसे ज्यादा कमाने वाले व्यक्ति की औसत मासिक पांच हजार रुपये से भी कम है। टिहरी में यह औसत 70.94 फीसदी है, जबकि अल्मोड़ा में 73.30 फीसदी परिवारों में औसत मासिक आय पांच हजार रुपये से कम है। इसी तरह पौड़ी में 59.17, बागेश्वर में 66.37, चंपवात में 73.12, चमोली में 60.07 फीसदी व पिथौरागढ़ में ऐसे 62.83 फीसदी परिवार हैं।
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देहरादून में सबसे कम

अस्थायी राजधानी देहरादून में पांच हजार से कम आय वालों की संख्या प्रदेश में सबसे कम 48.95 फीसदी है। जिले में 27.10 फीसदी परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक आय 10 हजार रुपये से भी अधिक है। देहरादून के बाद रुद्रप्रयाग जनपद में 53.74 फीसदी परिवारों में पांच हजार से कम मासिक आय वाले लोग हैं। अध्ययन में इसकी वजह रुद्रप्रयाग का पर्यटन और तीर्थांटन का केंद्र होना माना गया है। संस्थान ने यह आंकलन लोगों के क्रय शक्ति के आधार पर किया है। नैनीताल और ऊधम सिंह नगर की स्थिति पर्वतीय जनपदों की तुलना में बेहतर है। लेकिन दोनों जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर ठीक नहीं है।


पलायन की पीढ़ा बढ़ी
अध्ययन से यह भी पता चलता है कि उत्तराखंड में 24.8 फीसदी की दर से लोग पलायन कर रहे हैं। पलायन की यह दर राष्ट्रीय औसत 20.9 फीसदी से अधकि है। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश के कुल गांवों के 2.75 फीसदी यानी 375 गांव अकेले पौड़ी जनपद में खाली हो गए हैं। पलायन करने वाले पुरुषों में 40 फीसदी काम की तलाश में घर बार छोड़ रहे हैं। पलायन की मुख्य वजह रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन की तलाश है।  

 

 
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