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उत्तराखंड में लग्जरी कार, एसी, फर्नीचर की सरकारी खरीद पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Fri, 23 Jun 2017 08:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 23 Jun 2017 08:59 AM IST
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High court stop Purchase of luxary car, ac and furniture by government
nainital high court

सरकारी स्कूलों की व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश का पालन न होने से नाराज हाईकोर्ट ने लग्जरी कार, एसी, फर्नीचर आदि की सरकारी खरीद पर रोक लगाने का आदेश पारित किया। कोर्ट ने प्रदेश के वित्त सचिव और शिक्षा सचिव को भी 23 जून को कोर्ट में पेश होने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी स्कूलों में न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने में सरकार बुरी तरह से विफल साबित हुई है।

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देहरादून निवासी दीपक राणा की याचिका पर कोर्ट ने 19 नवंबर 2016 को सरकार को कई निर्देश दिए थे। इस मामले में अधिवक्ता ललित मिगलानी ने प्रार्थना पत्र देकर कोर्ट को बताया कि पूर्व आदेशों का पालन अभी तक नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने खासी नाराजगी जताई।
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कोर्ट ने कहा कि जब सारे अधिकारी कुर्सी पर बैठ सकते हैं तो बच्चे जमीन पर बैठ कर क्यों पढ़ें? बृहस्पतिवार को शिक्षा सचिव कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कोर्ट को बताया कि 14 मार्च 2017 को वित्त विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव पर वित्त विभाग से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए शिक्षा सचिव के साथ ही वित्त सचिव को 23 जून को कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए। कोर्ट ने 14 मार्च, 2017 के शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर कोई बजट आवंटित न होने पर हैरानी जताई और कहा कि यह बेहद खराब हालात की ओर इशारा कर रहा है। स्कूलों को सरकार प्राथमिकता में रखे।

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कोर्ट ने यह दिया था आदेश

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nainital high court

तीन माह में सरकारी स्कूलों में बेंच, डेस्क, चाक और डस्टर के साथ ब्लैक बोर्ड, कंप्यूटर, पुस्तकालय होना चाहिए। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय होना चाहिए। माध्यमिक स्तर तक के छात्रों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाए। छात्रों के लिए दो यूनिफार्म होनी चाहिए।

स्कूलों के भवन दुरुस्त होने चाहिए। स्कूलों में शुद्ध पीने के पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। गर्मी में पर्याप्त पंखे व ठंड में हीटर की व्यवस्था होनी चाहिए। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बीस हजार रुपये का अतिरिक्त अनुदान मदरसों को दिया जाए। अनुसूचित जाति एवं जनजाति एवं बीपीएल छात्र-छात्राओं को वजीफा (स्टाइपेंड) दिया जाए। कोर्ट ने कहा था कि आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए शिक्षा सचिव व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

कोर्ट की टिप्पणी

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नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

आदेश पारित के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सारे अधिकारी कुर्सी पर बैठ सकते हैं तो बच्चे जमीन पर बैठ कर क्यों पढ़ें?

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि पीने के पानी की व्यवस्था ठीक हो, जिससे पीलिया इत्यादि की शिकायत न हो। आजकल हल्द्वानी में गंदे पानी के कारण कई लोगों के पीलिया से ग्रस्त होने के मामले सामने आ रहे हैं। 

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से अमर उजाला शहर में गंदे पानी की आपूर्ति के कारण पीलिया के मामले बढ़ने के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा भी लेना पड़ा।

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