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प्राइवेट हाथों में नहीं दिया जा सकता खनन : HC
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
Updated Wed, 17 Dec 2014 11:46 AM IST
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उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड की खनन नीति 2011 (संशोधित मार्च 2013) को खारिज कर दिया है। इसमें निजी हाथों में खनन के पट्टे देने का प्रावधान किया गया था।
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खनन नीति 2011 को खारिज
कोर्ट ने कहा कि खनन कार्य निजी हाथों में नहीं दिया जा सकता है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष हुई। बाजपुर निवासी रंजीत सिंह गिल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर सरकार की ओर से खनन नीति 2011 को चुनौती दी थी।
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याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार की ओर से वन विकास निगम को दाबका नदी में खनन का पट्टा दिया गया था। नियमानुसार केवल वन विकास निगम ही खनन कार्य कर सकता है, लेकिन वन विकास निगम ने शर्तों के उल्लंघन में इसका उप-पट्टा कर दिया।
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इसके अलावा यह भारतीय वन अधिनियम 1927 व वन संरक्षण अधिनियम 1980 का भी उल्लंघन है। पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि खनन कार्य प्राइवेट हाथों में नहीं दिया जा सकता है और खनन नीति 2011 को खारिज कर दिया।