कार को डिस्पेंसरी बनाया और चल दिए मदद को
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पहाड़ों में पहाड़ सरीखी विपदा आई है। लोग कराह रहे हैं, किसी को अन्न चाहिए तो किसी को सिर छुपाने की जगह। इनमें से कई ऐसे भी हैं, जिन्हें इस वक्त इलाज की सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन रास्तों के कट जाने से स्वास्थ्य सेवाएं उन तक नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे में एक शख्स ने बिड़ा उठाया ऐसे लोगों के दुख हरने का।
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अपनी कार को ही डिस्पेंसरी का रूप दिया और चल दिए दूर पहाड़ों में लोगों की मदद को। ‘अमर उजाला’ के ‘हीरो ऑफ द डे’ कॉलम में जगह बना चुके डा. एसपी भट्ट विपदा की इस घड़ी में पहाड़ के लोगों के लिए सही मायने में सच्चे हीरो साबित हुए।
आपदा से सबसे अधिक प्रभावित रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जनपद के सैकड़ों गांवों में मेडिकल कैंप लगाकर लौटे डा. भट्ट ने पहाड़ के लोगों की जीवटता को भी सलाम किया। 9 दिन जगह-जगह कैंप करने के बाद उन्होंने वहां के हालात बयां किए। डा. भट्ट ने बताया कि लोग दर्द से कराह रहे हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। वे लगातार हालात से लड़ रहे हैं।
इस गांव के 92 लोग अब भी लापता
अपनी चार सदस्यों की टीम के साथ कार की डिक्की में दवाइयां और जरूरी उपकरण रख वे 9 तारीख को देहरादून से रुद्रप्रयाग के लमगौड़ी गांव पहुंचे। गुप्तकाशी से सात किमी पहले पड़ने वाले इस गांव के 92 लोग अब भी लापता हैं। 350 परिवारों वाले इस गांव के लोग हर तरह से संपन्न हैं। गांव में ही करीब 20 दुकानें हैं, जिनमें भरपूर राशन भरा है। लेकिन दवा के नाम डिस्प्रीन की गोली तक उपलब्ध नहीं है।
लोग उल्टी-दस्त और फोड़े-फुंसी से बेहाल हैं। गांव में इतनी बड़ी त्रासदी के बाद यहां के लोगों को दरकार है तो दवा और थोड़े से प्यार की। सरकार के स्तर पर कोई इनका हाल जानने नहीं पहुंचा, इससे लोग दुखी हैं।
ऐसा ही एक गांव है लौहार, जहां अधिकतर लोग उल्टी, दस्त, खुजली और वायरल फीवर से पीड़ित हैं। सरकार की तरफ से दवा के कुछ पैकेट पहुंचे थे, लेकिन जानकारी के अभाव लोग उनका इस्तेमाल नहीं कर सके। गांव में मेडिकल टीम पहुंची तो लोगों ने भगवान की तरह स्वागत किया।
टीम ने फाटा, नारायणीकोटी, कुठंरा, सेरसी, बडासु, मैखंडा, रामपुर, मनुकुटिया, खुमेरा, जामू, खडीया, धानी, व्यामगढ़, कोरखी, त्रीयुगीनारायण, कोसी, मंजोसी, किमाणा, जोशी गांव, कैनगढ़ आदि गांव में कैंप लगाकर लोगों को स्वास्थ्य लाभ दिया। इन गांवों के रास्ते में पड़ने वाले कई छोटे-छोटे बाजारों में दो कुर्सी लगाकर मरीजों को देखना शुरू किया तो भीड़ लग गई।
दून के डाक्टरों ने उपलब्ध कराई दवाएं
डा. एसपी भट्ट ने बताया कि कैंप के लिए दून के कई प्रतिष्टित डाक्टरों ने उन्हें दवा और अन्य जरूरी उपकरण मुहैया करवाए। गढ़वाल सभा से जुड़े लोग भी मदद को आगे आए। कइयों ने आपदाग्रस्त इलाकों में ही उनके साथ रहकर पीड़ितों की अपने-अपने ढंग से मदद की।
टीम में शामिल थे
वीर सिंह गुंसाई फार्मेसिस्ट, अवतार सिंह, देवेंद्र जोशी, विविध कोठारी।
जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रही राहत
डा. भट्ट ने बताया कि वासुकेदार और इसके आसपास के गांवों में आपदा का कहीं कोई असर नहीं है। लेकिन, गाड़ियां यहां तक पहुंच रही हैं। इसलिए सरकार और कई स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग यहीं लोगों को राशन और अन्य सामग्री बांट कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर दे रहे हैं। जबकि जिन लोगों को सहायता की जरूरत है, वे अब भी आस लगाकर बैठे हैं। खच्चरों के माध्यम से उन लोगों तक आसानी से राहत पहुंचाई जा सकती है।
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