जम्मू हादसा: सुमिता का उत्तराखंड से था गहरा नाता
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वैष्णो देवी के आधार शिविर कटरा में हेलीकॉप्टर हादसे में मारी गई पायलट सुमिता विजयन (45) का उत्तराखंड से गहरा नाता रहा है। उन्होंने दो सालों तक केदारघाटी के लिए हेलीकाप्टर उड़ाए थे। दून के जोगीवाला के नेहरूग्राम निवासी उनकी दोस्त निधि जुयाल ने सुमिता के निधन पर दुख जताते हुए पुरानी यादों को साझा किया।
निधि ने बताया कि विजयन जब केदारनाथ के लिए उड़ान भरने के लिए पहुंचीं तो सबसे पहले उनसे संपर्क किया था। निधि अपनी 17 साल पुरानी दोस्त के दुनिया से चले जाने पर बेहद अकेला महसूस कर रही हैं।
पायलट सुमिता विजयन तिरुवंतपुरम की रहने वाली थीं। उन्होंने 1997 में इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन की थी। सुमिता ने साल 2002 में इंडियन एयरफोर्स से बतौर स्क्वार्डन लीडर रिटायरमेंट लिया था। रिटायरमेंट के बाद सुमिता ने कि सी निजी कंपनी के लिए साल 2005 में पहली उड़ान केदारनाथ के लिए भरी। वह दो साल तक श्रद्धालुओं को केदारनाथ धाम ले जाती रहीं। इसके बाद उन्होंने अमरनाथ और फिर वैष्णो देवी के लिए हेलीकॉप्टर उड़ाए।
श्रद्धालुओं को केदारधाम ले जाने पर मिलता था सुख
एयरफोर्स की ड्यूटी के दौरान जब सुमिता विजयन वर्ष 2000 से 2002 तक बागडोगरा में रही तो दून के जोगीवाला निवासी निधि जुयाल से उनकी दोस्ती हो गई। निधि इंडियन एयरफोर्स में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में थीं। दोनों में इस कदर दोस्ती हुई कि अलग-अलग पोस्टिंग के बावजूद एक-दूसरे के घर आती-जाती थीं।
सुमिता ने वर्ष 2005 में जैसे ही केदारघाटी के लिए हेलीकॉप्टर उड़ाने शुरू किए तो सबसे पहले निधि को बताया। व्यस्तता के चलते वह निधि के घर नहीं आ पाई, लेकिन निधि के घरवालों को फोन कर अक्सर केदारनाथ बुलाती रही। सुमिता को हेलीकाप्टर से श्रद्धालुओं को केदारधाम ले जाने पर अलग सुख की अनुभूति होती थी।
यही वजह थी कि उन्होंने एयरफोर्स से रिटायरमेंट लेने के बाद केदारनाथ, अमरनाथ और वैष्णो देवी के लिए हेलीकॉप्टर उड़ाए। निधि की बहन नीरजा ने बताया कि निधि ने जैसे ही सुमिता की मौत की खबर सुनी उसकी तबीयत खराब हो गई। इसके बावजूद वह सहेली के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दिल्ली के लिए निकल पड़ी। बताया कि दोनों की दोस्ती 17 सालों की है। इस बीच हमारी भी कई बार सुमिता से मुलाकात हुई। उसकी मौत से परिवार शोक और सदमे में है।