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Dehradun News: गर्मी ढा रही सितम, उल्टी-दस्त की चपेट में आ रहे बच्चे
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शहर में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। भीषण गर्मी सितम ढा रही है। इसकी चपेट में बच्चे आ रहे हैं। उप जिला अस्पताल में रोजाना 100 से अधिक बच्चे उपचार के लिए आ रहे हैं। इनमें से करीब 30 बच्चे उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित मिल रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ ने अभिभावकों को भीषण गर्मी के बीच बच्चों का खास ध्यान रखने की सलाह दी है।
उप जिला अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में सोमवार को 100 बच्चे पहुंचे। इनमें से 30 बच्चे बुखार, उल्टी और दस्त से पीड़ित थे। चार बच्चों को भर्ती भी करना पड़ा। अस्पताल की ओपीडी रिकाॅर्ड के मुताबिक रोजाना बुखार, उल्टी और दस्त से पीड़ित 30 से 35 बच्चे अस्पताल में लाए जा रहे हैं। शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, उल्टी व दस्त बंद न होने पर तीन से चार बीमार बच्चों को भर्ती भी करना पड़ रहा है। बच्चों के बीमार होने का मुख्य कारण गर्मी को माना जा रहा है।
उप जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केएस चौहान बताते हैं कि आमतौर पर गर्मी बढ़ने के साथ बच्चों, बुजुर्गाें और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। इनमें बुखार, उल्टी और दस्त के मामले अधिकांश सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक धूप में निकलने से बचना चाहिए। अगर घर से निकला बहुत जरूरी है छतरी का प्रयोग करें। दोपहिया वाहनों के चलाने वाले लोग चेहरे को कपड़े से ढकने के साथ चश्मा भी लगाएं। बच्चों को बाहर से आने पर तुरंत पानी नहीं दें। घर पर बनाए गए फलों का ताजा जूस, शिकंजी, गन्ने के जूस, कम मिठास वाले शरबत पिलाएं।
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उप जिला अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में सोमवार को 100 बच्चे पहुंचे। इनमें से 30 बच्चे बुखार, उल्टी और दस्त से पीड़ित थे। चार बच्चों को भर्ती भी करना पड़ा। अस्पताल की ओपीडी रिकाॅर्ड के मुताबिक रोजाना बुखार, उल्टी और दस्त से पीड़ित 30 से 35 बच्चे अस्पताल में लाए जा रहे हैं। शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, उल्टी व दस्त बंद न होने पर तीन से चार बीमार बच्चों को भर्ती भी करना पड़ रहा है। बच्चों के बीमार होने का मुख्य कारण गर्मी को माना जा रहा है।
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उप जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केएस चौहान बताते हैं कि आमतौर पर गर्मी बढ़ने के साथ बच्चों, बुजुर्गाें और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है। इनमें बुखार, उल्टी और दस्त के मामले अधिकांश सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक धूप में निकलने से बचना चाहिए। अगर घर से निकला बहुत जरूरी है छतरी का प्रयोग करें। दोपहिया वाहनों के चलाने वाले लोग चेहरे को कपड़े से ढकने के साथ चश्मा भी लगाएं। बच्चों को बाहर से आने पर तुरंत पानी नहीं दें। घर पर बनाए गए फलों का ताजा जूस, शिकंजी, गन्ने के जूस, कम मिठास वाले शरबत पिलाएं।
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