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कमजोर हो रही है उत्तराखंड की रीढ़

Sun, 09 Feb 2014 09:01 PM IST
रविंद्र थलवाल/अमर उजाला, उत्तरकाशी
रविंद्र थलवाल/अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Sun, 09 Feb 2014 09:01 PM IST
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health of women in uttarakhand

जिला अस्पताल उत्तरकाशी की पैथालॉजी में हो रही जांच में हर माह 200 से अधिक महिलाओं में खून की कमी की पुष्टि हो रही है। जबकि 14 से अधिक महिलाएं एनिमिया रोग से ग्रसित पाई जा रही है। इसमें गर्भवती महिलाओं की तदाद ज्यादा है।

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सामान्य से कम है खून
महिलाओं 8 से 11 ग्राम के बीच खून पाया जा रहा है। जबकि स्वस्थ महिला में 11 से 13 ग्राम के बीच खून होना चाहिए।

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इन महिलाओं में 7 ग्राम से कम होने के कारण इन्हें खून चढ़ाना अतिआवश्यक है। इसमें गभर्वती महिलाओं के साथ ही सामान्य बीमारियां से ग्रसित महिलाएं भी हैं।

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क्यों हो रही खून कमी और कैसे होगी दूर?

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डाक्टरों के अनुसार पौष्टिक आहार न लेने से महिलाओं में खून कमी हो रही है। इसके लिए महिलाओं को हरी सब्जियों के साथ ही सेब, केला आदि खाने चाहिए।

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गर्भवती महिलाओं को खुराक की ज्यादा जरूरत अधिक होती है। ऐसे में उन्हें पौष्टिक आहार के साथ आयरन की गलियां भी खानी चाहिए।

क्या कहते हैं आंकड़े
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम की रिपोर्ट पर नजर दोहराएं तो जिले में अप्रैल 2013 से जनवरी 2014 तक 69 गर्भवती महिलाओं को खून चढ़ाया गया। जबकि कुल पंजीकृत 4500 गर्भवती महिलाओं में से 2000 से अधिक महिलाएं खून की कमी से जूझ रही है।

विशेषज्ञों का है कहना

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वास्तव में महिलाओं में खून की कमी दर्ज की जा रही है। इसका प्रमुख कारण खान-पान है। खून की कमी को दूर करने के लिए पत्तेदार हरी सब्जी तथा सेब, केला के साथ पौष्टिक आहार लेना जरूरी है।
-डा. मयंक उपाध्याय, सीएमओ एवं महिला रोग विशेषज्ञ।

एनआरएचएम के तहत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी दूर करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही महिलाओं को ऑयरन की गोलियां दी जाती हैं, जो महिलाएं गोलियां खाने परहेज करती है उन्हें ऑयरन के इंजेक्शन भी लगाए जाते हैं।
-विमला मखलोगा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनआरएचएम।

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