उत्तराखंड में कोरोना : अस्पताल से होम आइसोलेशन में भेज स्वास्थ्य विभाग नहीं ले रहा समय पर सुध
दवाइयां और ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर आदि की किट मिलने में भी एक हफ्ते तक का समय लग जा रहा है। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।
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देहरादून जिले में एक तरफ जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या रफ्तार पकड़ रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम आइसोलेट मरीजों की सुध नहीं ली जा रही है। संक्रमित की काउंसिलिंग के लिए दो से तीन दिन बाद संपर्क किया जा रहा है। साथ ही दवाइयां और ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर आदि की किट मिलने में भी एक हफ्ते तक का समय लग जा रहा है। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।
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उल्लेखनीय है कि कोरोना की नई लहर में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में से देहरादून में लगभग हर रोज बड़ी संख्या में मरीज संक्रमित पाए जा रहे हैं। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंभीर मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ गई है।
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इसे देखते हुए शासन-प्रशासन के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से कम गंभीर मरीजों को कोविड केयर सेंटर और होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जा रही है। साथ ही उनको यह भी बताया जा रहा है कि उन्हें आवश्यक दवाएं स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध करा दी जाएंगी।
बाजार में रेमडिसिविर इंजेक्शन की किल्लत
प्राथमिक लक्षणों के आधार पर आवश्यक दवाएं अस्पताल की ओर से दी जा रही हैं, लेकिन होम आइसोलेशन में जाने के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
उन्हें न तो समय पर काउंसिलिंग के लिए फोन किया जा रहा है और न ही कोरोना दवा की किट समय पर दी जा रही है। इस संबंध में प्रदेश के सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने बताया कि होम आइसोलेशन में जाने वाले मरीजों की संख्या एकाएक तेजी से बढ़ी है।
इससे किट तैयार करने में कुछ समय लग रहा होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना दवा किट की विभाग के पास कोई कमी नहीं है। अगर इसे लेकर कोई दिक्कत आ रही है तो वह मातहत अधिकारियों से बात कर समस्या का समाधान करने के दिशा-निर्देश देंगे।
बाजार में रेमडिसिविर इंजेक्शन गायब हो गया है। डॉक्टर तीमारदारों को जरूरत के हिसाब से मरीजों के लिए इस इंजेक्शन की व्यवस्था करने के लिए कह रहे हैं। इसके लिए तीमारदार एक केमिस्ट से लेकर दूसरे केमिस्ट के पास भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। इसे देखते हुए तीमारदार मरीजों को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर करवा रहे हैं।
दरअसल, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती मरीजों को यह इंजेक्शन लगाया जा रहा है, जो कि टेंडर के तहत पहले ही सरकारी कॉलेज अस्पताल प्रशासन द्वारा मंगाया चुका था। इससे दून अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। इससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी प्रभाव पड़ रहा है।