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राहुल की रैली के बाद रावत को देनी होगी अग्निपरीक्षा
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 24 Feb 2014 11:24 AM IST
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देहरादून में राहुल गांधी की सम्मानजनक रैली और विरोधियों के मुंह से तारीफ कराकर हरीश रावत ने अपने को स्थापित कर लिया है। जबकि हरीश रावत की अग्निपरीक्षा अब शुरू होनी है।
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भरोसे पर खरा उतरना होगा
हरीश रावत ने राहुल गांधी को इस भरोसे के साथ भेजा है कि सोनिया गांधी से कह दें कि हम पांचों लोकसभा सीटें जिताकर देंगे। अब उन्हें इसी भरोसे पर खरा उतरना होगा।
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पिछले 23 दिनों की हरीश रावत सरकार खुद केबदले वर्जन, समाज के सभी वर्गों के लिए सैकड़ों घोषणाएं और नई कार्य संस्कृति के दम पर चली है। सरकार को न चाहते हुए भी तत्काल पंचायत चुनावों का सामना करना होगा।
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यूं तो पंचायत चुनाव पार्टी के निशान पर नहीं लड़े जाते हैं लेकिन इसे राजनीति की कसौटी पर ही कसा जाना है। ऐसे में हरीश रावत को जमीनी स्तर पर यह साबित करना होगा कि कांग्रेस की जड़े जमीं हुई हैं।
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अभी तक प्रदेश की 13 जिला पंचायतों में ऊधमसिंह नगर को छोड़ सभी भाजपा के पास रही हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में भी कांग्रेस के पास एक भी नगर निगम नहीं है। ऐसे निचले स्तर पर पार्टी को मजबूती देना बड़ी चुनौती है।
जमीनी स्तर पर हो सकता है नुकसान
सरकार की बार-बार पंचायत चुनाव को आगे बढ़ाने की मंशा भी जमीनी स्तर पर नुकसान पहुंचा सकती है। पंचायत चुनाव के तुरंत बाद ही लोकसभा के चुनाव होने हैं।
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2009 में पांचों सीट जीतने वाली कांग्रेस ने उपचुनाव में भारी भरकम उम्मीदवार के बाद भी टिहरी लोकसभा की सीट हारी है।
चूंकि हरीश रावत खुद मुख्यमंत्री बन गए हैं ऐसे में हरिद्वार सीट को जिताने के साथ उन्हें अल्मोड़ा सीट को भी उनकी जीत-हार से जोड़कर देखा जाएगा।
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हरीश रावत 1980 से अल्मोड़ा लोकसभा सीट का ही प्रतिनिधित्व करते आए हैं। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस के अंदर ही 2-3 लोकसभा सीटें जीतने की बात कही जा रही है ऐसे में हरीश रावत को पार्टी के साथ खुद को भी साबित करना होगा।