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ठुकराल के आत्मसमर्पण ने साफ किया रावत का 'रास्ता'

Fri, 28 Feb 2014 10:18 AM IST
अमर उजाला, हल्द्वानी
अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Fri, 28 Feb 2014 10:18 AM IST
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harish rawat will fight elections from rudrapur

परिस्थितियां ऐसी बन रही हैं कि उत्तराखंड का आठवां मुख्यमंत्री भी ऊधमसिंह नगर के हिस्से ही आने वाला है।

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संभावनाओं को और बल मिला
रुद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल के आत्मसमर्पण के बाद इन संभावनाओं को और बल मिला है। पिछले दिनों तिलकराज बेहड़ के बढ़े कद को भी लोग इसी क्रम से जोड़कर देख रहे हैं।

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यदि ठुकराल पर आरोप सिद्ध होते हैं तो उन्हें विधायक पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। इससे कांग्रेस का रास्ता खुद साफ हो जाएगा। दूसरी कोशिशें भी जारी हैं। हालांकि, दूसरे कारणों से इस्तीफा देने से ठुकराल ने इनकार किया है।
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मुख्यमंत्री बनने के करीब 26 दिन बाद हरीश रावत पहली बार कुमाऊं दौरे पर थे। इससे पहले तीन बार उनका धारचूला का कार्यक्रम टल चुका था। रावत के कुमाऊं में पैर रखते ही उनके विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर भी चर्चा तेज हो गई।

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राजकुमार ठुकराल के आत्मसमर्पण से पहले माना जा रहा था कि श्री रावत धारचूला से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन यह केवल कयास थे, क्योंकि मुख्यमंत्री कभी अपने गुट के विधायकों की संख्या कम नहीं करना चाहेंगे।

बहुगुणा के खिलाफ सबसे मुखर रहे हैं धामी
हरीश धामी उन विधायकों में हैं जो विजय बहुगुणा के खिलाफ सबसे अधिक मुखर रहे। ऐसे में रुद्रपुर एक संभावना बन रही है। कांग्रेस के जानकार तिलकराज बेहड़ को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देना भी इसी क्रम का हिस्सा मान रहे हैं।

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पिछली सरकार में शामिल मंत्रियों के अलावा बेहड़ कांग्रेस के इकलौते ऐसे नेता हैं, जिन्हें रावत ने बीज प्रमाणीकरण संस्थान के अध्यक्ष पद से नवाजा है। बेहड़ को यह पद देने के लिए सीएम ने तेजतर्रार हरक सिंह रावत से भी नाराजगी मोल ली।

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हालांकि, अब हरक सिंह रावत खुद ही घिर गए हैं। बेहड़ की रुद्रपुर के पंजाबी मतों में पकड़, कांग्रेस का कैडर वोट और सीएम का अपना दमखम उनकी जीत के लिए पर्याप्त है। अब राजकुमार ठुकराल के आत्मसमर्पण के बाद कई और रास्ते बनते दिख रहे हैं।

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