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विभागों को लेकर बुरी तरह घिरे हरीश रावत

Thu, 13 Feb 2014 11:04 PM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 13 Feb 2014 11:04 PM IST
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harish rawat face trouble in assembly

मंत्रियों को 13 दिन बाद भी विभाग न बांटने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत बृहस्पतिवार को सदन में बुरी तरह घिर गए। अभी तक विपक्ष ही इसे संवैधानिक संकट बता हंगामा कर रहा था।

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बृहस्पतिवार को कांग्रेस के दो विधायक भी इस मुद्दे पर बेबाकी से बोले।

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शाम तक कोई समाधान न मिलता देख विपक्ष के सदस्यों ने वॉकआउट किया। विपक्ष की गैरमौजूदगी में विधानसभा अध्यक्ष ने अपने फैसले में कहा कि विपक्ष का सवाल स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

सदन में छाया संवैधानिक संकट का मुद्दा

harish rawat face trouble in assembly

बजट पर नेता सदन का भाषण भी हो गया और कुछ विभागों के बजट मंत्रियों ने पेश कर पारित भी करा लिए लेकिन उत्तराखंड विधानसभा में संवैधानिक संकट का मुद्दा तमाम सवाल खड़े कर गया।

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विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इस सवाल पर पूर्ण विराम लगाने की कोशिश की गई।

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उन्होंने कहा कि सारे अधिकार मुख्यमंत्री में निहित हैं इसलिए वह किसी भी मंत्री से विभागीय बजट पेश करा सकते हैं। इसलिए यह सवाल ही नहीं उठता कि मंत्री किस हैस‌ियत से बजट पेश कर रहे हैं।

नेता सदन और प्रतिपक्ष आमने-सामने

harish rawat face trouble in assembly

दोपहर बाद बजट पर चर्चा के लिए नेता सदन हरीश रावत पहुंचे तो भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और विधायक मदन कौशिक ने फिर से संविधान के पन्ने पलटकर संवैधानिक संकट की बात कही।

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अजय भट्ट ने कहा कि अभी तक राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री को भी कोई अनुमोदन नहीं मिला है कि सभी विभाग उनके पास निहित हैं। फिर मुख्यमंत्री कैसे दूसरे मंत्रियों को विभागीय बजट पेश करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं।

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उनका कहना था कि इंदिरा ह्दयेश का बतौर वित्त मंत्री बजट पेश करना असंवैधानिक है।

और खड़े हो गए कांग्रेस विधायक ही

harish rawat face trouble in assembly

सदन में चल रहे हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक नवप्रभात खड़े हुए और कहा कि बार-बार संवैधानिक संकट, परंपरा का सवाल उठ रहा है। इस पर अध्यक्ष की ओर कोई फैसला आना चाह‌िए।

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कांग्रेस के ही शैलेन्द्र मोहन सिंघल ने भी इस जटिल होती समस्या के समाधान के लिए महाधिवक्ता की राय की बात कही।

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इस पर खुद नेता सदन ने खड़े होकर कहा कि कोई संवैधानिक संकट नहीं है इसलिए राय की जरूरत नहीं है।

मुख्यमंत्री ने दिया विपक्ष को जवाब

harish rawat face trouble in assembly

विपक्ष के सवालों को जवाब देते हुए हरीश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल मंत्रियों के कामों को बंटवारा करते हैं। सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने का अधिकार नेता सदन है।

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सदन में मंत्रियों को कौन सी जिम्मेदारी दे यह अधिकार मुख्यमंत्री का है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच होने वाली सारी प्रक्रिया जरूरी नहीं कि बताई जाए।

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इस पर विपक्ष ने गजट की प्रति मांगी जिसमें मुख्यमंत्री को सभी विभागों के लिए अधिकृत किया गया है। इस पर हरीश रावत ने कहा अभी मैंने राज्यपाल से कहा है प्रक्रिया चल रही है। विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष ने एक बार फिर कोई फैसला लेने को कहा।

इंद‌िरा हृदयेश ने दी सदस्यों को च‌िठ्ठी

harish rawat face trouble in assembly

साढे़ पांच बजे फिर सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो इंदिरा ह़दयेश ने सभी सदस्यों को एक चिट्ठी बांटी जिसमें मुख्य सचिव की ओर इंदिरा ह्दयेश को संसदीय कार्य मंत्री और मुख्यमंत्री में सभी विभागों के निहित होने की जानकारी दी गई थी।

भाजपा ने किया वॉकऑउट
इस पर मदन कौशिश ने विरोध जताया और कहा कि दो दिनों से हंगामा हो रहा है। नेता सदन ने बयान दिया था कि राज्यपाल से बात हो रही है। अब जो पत्र बांटा जा रहा है उसमें सभी विभागों के निहित होने की बात कही जा रही है। जो सरासर सदन को गुमाराह करने वाला और अवमानना है। यह पत्र भी सत्य से परे है। इसके बाद भाजपा विधायक वॉकआउट कर गए।

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