हरिद्वार : कांस्टेबल कल्पना के ‘बाबू’ शब्द कहते ही खुल जाता है जाम, कई वाहन चालक करते हैं सैल्यूट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कल्पना गहलोत... यह नाम हरिद्वार के लोगों के लिए गुमनाम नहीं है। पुलिस के आला अफसरों और कैबिनेट मंत्री से लेकर अधिकतर आम लोग इन्हें बखूबी जानते और पहचानते हैं।
मौसम कोई भी हो, पुलिस कांस्टेबल कल्पना चौराहों पर खुले आसमान के नीचे ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाती हैं। मुस्कुराहट बिखेरकर वाहन चालकों का अभिवादन करती हैं। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को फटकारने के बजाय ‘बाबू’ शब्द से संबोधन कर समझाती भी हैं।
कल्पना गहलोत मृतक आश्रित कोटे से कांस्टेबल हैं। पति उपनिरीक्षक अतीत गहलोत के वर्ष 2003 में आकस्मिक निधन के बाद कल्पना दो बच्चों की जिम्मेदारी बखूबी निभाने के साथ वर्ष 2007 में बतौर कांस्टेबल पुलिस विभाग में भर्ती हुईं।
पिछले दस वर्षों से कल्पना हरिद्वार में तैनात हैं। उनके व्यवहार से हर कोई प्रभावित है। ठंड हो या गर्मी या बारिश, वह प्रमुख चौराहों पर ड्यूटी कर यातायात संभालती हैं। चौराहों से गुजरने वाले वाहन चालकों को मुस्कुराहट बिखेरकर उनका अभिवादन करती हैं।
चार चौराहों पर संभालती हैं यातायात की कमान
कई कार चालक शीशा डाउन कर कल्पना को सैल्यूट भी करते हैं। नियमों को तोड़ने वालों का चालान करने और फटकारने के बजाय समझाती हैं। कोई छोटा हो या बड़ा, सबको बाबू शब्द से संबोधित करती हैं। उनका व्यवहार देख यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले खुद को गुनहगार समझकर फिर कभी नियमों का उल्लंघन न करने का संकल्प भी लेते हैं।
कल्पना के व्यवहार और ईमानदारी से ड्यूटी निभाने का हर कोई कायल है। इनमें पुलिस के आला अफसर और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी शामिल हैं। मदन कौशिक सम्मानित भी कर चुके हैं। चौराहों से गुजरने वाले अफसर कल्पना के सम्मान में सैल्यूट भी करते हैं।
कल्पना मूल रूप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं। उनके बेटे मुकुल एमबीए द्वितीय वर्ष के छात्र हैं जबकि बेटी अभिलाषा एमबीए की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। कल्पना बताती हैं कि वह सुबह दस से शाम छह बजे तक भगत सिंह चौक, रानीपुर मोड़, ऋषि चौक और शंकर आश्रम चौक पर ड्यूटी करती हैं।