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हरिद्वार: बुजुर्ग महिला को अपनों ने ठुकराया तो मित्र पुलिस के दो दरोगाओं ने बेटा बन किया अंतिम संस्कार
Wed, 01 Sep 2021 04:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 01 Sep 2021 04:04 PM IST
सार
हरिद्वार नगर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली 95 वर्षीय वृद्धा संतोष देवी गंगा किनारे के घाटों पर थैले बेच कर अपना जीवन यापन करतीं थीं। कोरोना संक्रमण की पहली लहर में हरकी पैड़ी चौकी इंचार्ज अरविंद रतूड़ी को एक व्यक्ति ने संतोष देवी के बारे में बताया था। इसके बाद अरविंद रतूड़ी ने उनसे मुलाकात की और उसके बाद उनकी देखभाल शुरू कर दी।
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पवन डिमरी व अरविंद रतूड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड की मित्र पुलिस लोगों से मित्रवत का व्यवहार ही नहीं करती। कई बार वह गैरों को अपनाकर न सिर्फ उनकी देखभाल अपनों की तरह करती है, बल्कि अंतिम समय में बेटा बनकर हिंदु धर्म की परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार भी करती है। हरकी पैड़ी और रोड़ीबेलवाला चौकी इंचार्ज ने आज ऐसी ही एक बुजुर्ग महिला के निधन होने पर उसको कंधा दिया और अंतिम संस्कार भी किया।
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गंगा किनारे के घाटों पर थैले बेच कर अपना जीवन यापन करतीं थीं संतोष
हरिद्वार नगर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली 95 वर्षीय वृद्धा संतोष देवी गंगा किनारे के घाटों पर थैले बेच कर अपना जीवन यापन करतीं थीं। कोरोना संक्रमण की पहली लहर में हरकी पैड़ी चौकी इंचार्ज अरविंद रतूड़ी को एक व्यक्ति ने संतोष देवी के बारे में बताया था। इसके बाद अरविंद रतूड़ी ने उनसे मुलाकात की और उसके बाद उनकी देखभाल शुरू कर दी।
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संतोष देवी को बेटी ने वापस भेज दिया था हरिद्वार
जानकारी के अनुसार संतोष की एक बेटी भी है जो हल्द्वानी में रहती है। कुछ समय पहले महिला अपनी बेटी के पास रहने के लिए गई थी। बताते हैं वहां से उन्हें वापस भेज दिया गया था। एक महीने से संतोष देवी की हालत खराब हो गई थी। तब से अरविंद रतूड़ी उनकी देखभाल कर रहे थे।
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सोमवार शाम को संतोष देवी ने अंतिम सांस ली। अरविंद रतूड़ी ने मानवता का परिचय देते हुए रोड़ी बेलवाला चौकी इंचार्ज पवन डिमरी व उनकी टीम के साथ खड़खड़ी श्मशान घाट में वृद्धा का अंतिम संस्कार कर नम आंखों से विदाई दी।
दस साल से रह रही थीं रैन बसेरे में
सीसीआर भवन के पास भारत स्काउट एंड गाइड का रैन बसेेरा है। दस साल से संतोष देवी यहीं रात काटती थी। हरकी पैड़ी पुलिस चौकी का पूरा स्टाफ संतोष देवी का ध्यान रखता था।