कुंभ मेला 2021: स्वामी तेजेशानंद बने महामंडलेश्वर, संत और महंतों ने तिलक चादर भेंट कर किया पट्टाभिषेक
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भोलागिरी आश्रम में स्वामी तेजेशानंद गिरि को निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के नेतृत्व में श्री पंचायती अखाड़ा आनंद का महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया। इसके बाद निरंजनी एवं आनंद अखाड़े के संत महापुरुषों ने स्वामी तेजेशानंद गिरि का तिलक चादर भेंट कर पट्टाभिषेक किया।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा कि स्वामी तेजेशानंद गिरि एक विद्वान महापुरुष हैं। जो महामंडलेश्वर पद पर रहते हुए संपूर्ण भारत में भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर अखाड़े की परंपराओं को मजबूती प्रदान करेंगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का शिखर पर्व है। महामंडलेश्वर बनने वाले महापुरुष सदैव ही राष्ट्र उत्थान में अपना योगदान प्रदान करते हैं।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि ने कहा कि नवनियुक्त महामंडलेश्वर स्वामी तेजेशानंद गिरि आनंद अखाड़े की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी एवं श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरि ने संयुक्त रूप से कहा कि संतों का जीवन सदैव सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित रहता है।
इस दौरान श्रीमहंत रामरतन गिरि, श्रीमहंत ओमकार गिरि, श्रीमहंत लखन गिरि, महंत राधे गिरि, महंत नरेश गिरि, श्रीमहंत दिनेश गिरि, महंत शिवशंकर गिरि, दिगंबर बलवीर पुरी, स्वामी रघुवन, स्वामी रविवन, स्वामी आलोक गिरी, दिगंबर आशुतोष पुरी आदि संत मौजूद रहे।
बैरागी संतों को सुविधाएं दे प्रशासन : नरेंदगिरि
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्रगिरि ने बैरागी कैंप पहुंचकर तीनों बैरागी अणी अखाड़ों के कुंभ मेला कार्यों का जायजा लिया। अपर मेलाधिकारी हरबीर सिंह और उप मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती भी साथ मौजूद रहे।
श्रीमहंत नरेंद्रगिरि ने मेला प्रशासन से तीनों वैष्णव अखाड़ों में बिजली, पानी और अतिरिक्त शौचालय एवं कोठार भंडार बनाने की मांग करते हुए कहा कि 15 मार्च के बाद बड़ी संख्या में वैष्णव संत हरिद्वार आएंगे। मेला प्रशासन सभी कार्य एवं बैरागी संतों के लिए मूलभूत सुविधाएं समय रहते उपलब्ध कराए। श्रीपंच निर्मोही अणी अखाड़े के स्थानीय प्रतिनिधि महंत प्रह्लाद दास ने कहा कि वैष्णव संतों के शिविर कुंभ मेले में आकर्षण का केंद्र होते हैं।
महंत दुर्गादास ने कहा कि मेला प्रारंभ होने में बहुत कम समय रह गया है। गीता आश्रम के संचालक महंत स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती ने कहा कि मेला प्रशासन को संतों की समस्याओं पर ध्यान देते हुए उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए। अपर मेलाधिकारी हरबीर सिंह ने संतों को आश्वासन दिया कि बैरागी संतों के हरिद्वार आगमन से पहले ही सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।
नागा संन्यासियों के अखाड़े में रमता पंच का महत्वपूर्ण स्थान
नागा संन्यासियों के अखाड़ों में रमता पंच जिन्हें पंचपरमेश्वर भी कहा जाता है का महत्वपूर्ण स्थान है। रमता पंचों की पूरी जमात पूरे देश में सनातन धर्म का प्रचार करते हुए भ्रमण करती रहती हैं।
जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत मोहन भारती ने बताया कि कुंभ मेलों में जब पंच परमेश्वर छावनी प्रवेश कर लेते हैं तो कुंभ मेले एवं अखाड़ों की समस्त व्यवस्थाएं इनके हाथों में आ जाती हैं। कोठार और कारोबार पर इनका नियंत्रण हो जाता है।
समस्त आय-व्यय व अन्य व्यवस्थाएं इनकी देख-रेख में होती हैं। उन्होंने बताया जूना अखाड़ा के पंचपरमेश्वर की जमात में चार श्रीमहंत, चार अष्ट कौशल महंत, चार कोठारी, चार कारोबारी, चार भंडारी, चार कोतवाल, दो पुजारी और फुटकर साधु शामिल हैं।
रमता पंचों की जमात एक कुंभ मेला संपन्न होने पर दूसरे कुंभ मेले के लिए कूच कर जाती हैं। श्रीमहंत मोहन भारती ने कहा हरिद्वार कुंभ के समापन के बाद रमता पंच अपने लाव लश्कर जिनमें ट्रैक्टर-ट्राली, ट्रक और अन्य वाहनों के साथ 2024 के प्रयागराज कुंभ के लिए कूच कर जाएंगे।
रमता पंच का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। हरिद्वार कुंभ में वर्तमान रमता पंच का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और 12 अप्रैल के दूसरे शाही स्नान के नए पंचों का चयन कर लिया जाएगा। 14 अप्रैल का तीसर शाही स्नान नवनिर्वाचित रमता पंचों की सुनवाई में होगा।