कमियां छिपाने के लिए कुंभ में कोरोना का बहाना बना रही सरकार: महंत नरेंद्रगिरि
- अखाड़ा परिषद अध्यक्ष बोले, सरकार के थोपे निर्णय मानने के लिए बाध्य नहीं संत
- 27 फरवरी को अखाड़ा परिषद की बैठक में तय होगी रणनीति
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी कमियां छुपाने के लिए कोरोना का बहाना बनाकर अपने निर्णय संतों पर थोप रही है। उन्होंने कुंभ की अवधि कम करने और सुविधाएं नहीं दिए जाने पर सरकार की आलोचना की। सवाल किया कि प्रयागराज और वृंदावन मेलों में कोरोना से कोई परेशानी नहीं हुई है तो देवभूमि में कुंभ में परेशानी कैसे हो सकती है।
श्रीमहंत नरेंद्रगिरि ने यह बात बैरागी अखाड़ों के श्रीमहंतों और संतों से मुलाकात के बाद कही। टेंट और सुविधाएं नहीं मिलने से बैरागी अखाड़ों की नाराजगी दूर करने के लिए वह बृहस्पतिवार को संत महंतों से मिलने गए थे। उन्होंने बैरागी अखाड़ों की नाराजगी को जायज ठहराया।
परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्रगिरि ने बैरागी अखाड़ों के नाराज संतों से कई घंटे बंद कमरे में मुलाकात की। अध्यक्ष ने मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला नजदीक है, लेकिन बैरागी अखाड़ों के लिए टेंट, बिजली, पानी, शौचालय और अन्य सुविधाएं नहीं मिली हैं। इस मामले में मेला प्रशासन और सरकार से वार्ता की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी 13 अखाड़ों के लिए व्यवस्थाएं कराई जाएं। 27 फरवरी के स्नान के बाद अखाड़ा परिषद सभी अखाड़ों के संतों और पदाधिकारियों के साथ बैठक करेगा। सामूहिक बैठक में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
श्रीमहंत नरेंद्रगिरि ने कहा कि सरकार के कार्यों से संत संतुष्ट नहीं हैं। कुंभ मेले को लेकर अखाड़ों और संतों के बीच असमंजस की स्थिति बनी है। उन्होंने कुंभ अवधि कम करने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साथ मुख्यमंत्री ने चार शाही स्नान की घोषणा की थी। सरकार ने संतों को विश्वास में लिए बगैर ही दो शाही स्नान कर कुंभ अवधि कम कर दी है।
संत सरकार के निर्णय को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं
उन्होंने कहा कि संत सरकार के निर्णय को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। सरकार ने अवधि कम करने और शाही स्नान घटाने पर संतों और परिषद से कोई राय नहीं ली है। इस अवसर पर श्रीमहंत रविंद्रपुरी, श्रीमहंत रामरतन गिरि, श्रीमहंत ओमकार गिरि, महंत राधे गिरि, महंत रामजी दास, महंत मोहन दास, महंत सुखदेव दास आदि संत मौजूद रहे।
कुंभ मेला प्रशासन ने बैरागी अखाड़ों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है। कुंभ भव्य और दिव्य होना चाहिए। इसके लिए ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष से मुलाकात की। सरकार से मांग की जाएगी कि प्रयागराज और वृंदावन की तर्ज पर ही कुंभ मेला कराया जाए।
- श्रीमहंत राजेंद्र दास, पंच निर्मोही अखाड़ा
16 मार्च को वृंदावन से लाखों की संख्या में वैष्णव अखाड़ों के खालसे हरिद्वार आएंगे। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले संतों के लिए मेला प्रशासन की ओर से अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। जिससे भारी अव्यवस्थाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- श्रीमहंत राजेंद्रदास, अध्यक्ष अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अणि अखाड़ा
मेला प्रशासन को भूमि आवंटित कर बैरागी संतों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। मेले के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, कथा प्रवचन की अनुमति भी सरकार को देनी चाहिए। सुविधाएं उपलब्ध नहीं मिलने पर वैष्णव संत उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
- श्रीमहंत धर्मदास, अध्यक्ष श्रीपंच निर्वाणी अणि अखाड़ा