हरिद्वार कुंभ 2021ः धूम-धाम से निकली आनंद और आह्वान अखाड़ा की पेशवाई, देखने वालों का लग गया हुजूम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आनंद और पंचदशनाम आह्वान अखाड़े की पेशवाई आज शुक्रवार को धूमधाम से निकाली जा रही हैं। दोनों पेशवाई का समय अलग-अलग है। इस क्रम में आज पहले आनंद अखाड़े की पेशवाई निकाली गई। जिसे देखने और साधु-संतों का आशीर्वाद पाने के लिए लोगों की भीड़ लग गई।
यह भी देखें... महाकुंभ 2021: जूना, अग्नि और किन्नर अखाड़े की निकली भव्य पेशवाई, लाव-लश्कर के साथ निकले संत, तस्वीरें...
आनंद अखाड़ा की पेशवाई एसएमजेएन कॉलेज से शुरू हुई। पेशवाई शंकर आश्रम तिराहे से सिंहद्वार गई। यहां से कनखल रोड पर दादूबाग मंदिर, दिव्य योग मंदिर, मिश्रा मार्केट होते हुए झंडा चौक पहुंची।
झंडा चौक से गांधी मार्ग और पहाड़ी बाजार होते हुए रामकिशन तिराहे से गीता मंदिर के सामने से नया उदासीन अखाड़ा की छावनी, चेतनदेन की कुटिया व जगद्गुरु आश्रम के सामने से शंकराचार्य चौक पहुंचेगी। इसके बाद डामकोठी गंगनहर पार कर तुलसी चौक से दाहिनी ओर मुड़कर शिवमूर्ति तिराहा से चित्रा टाकिज, ललतारौ पुल से भाटिया भवन पाकर कर श्री निरंजनी अखाड़े से होते हुए पंचायती आनंद अखाडे़ में पहुंचेगी।
वहीं पंचदशनाम आह्वान अखाड़े की पेशवाई ज्वालापुर के पांडेवाला से शुरू हुई। यह गुघाल रोड होते हुए इंद्रपुरी तिराहे से नील खुदाना मोहल्ले से पांवधोई चौराहे से घास मंडी पहुंची।
इसके बाद चौक बाजार से पुलिस रेल चौकी के सामने से रेलवे तिराहे से दाहिनी तरफ मुड़कर दुर्गा चौक होते हुए आर्यनगर चौक, शंकर आश्रम, चंद्राचार्य चौक, पुरानी रानीपुर मोड़, ऋषिकुल तिराहे, देवपुरा, से शिवमूर्ति पहुंचेगी। इसके बाद यहां से चित्रा टाकिज के सामने से वाल्मीकि चौक होकर जूना अखाड़ा के मुख्य द्वार के सामने से होकर अखाड़े की छावनी पहुंचेगी।
उपनगरी में 11 वर्ष बाद फिर उमड़ा जनसैलाब
उपनगरी ज्वालापुर से होकर निकली तीन अखाड़ों की पेशवाई ने वर्ष 2010 के महाकुंभ की याद ताजा करा दी। कोरोना संक्रमण का डर भी श्रद्धालुओं को रोक नहीं पाया। पेशवाई देखने के लिए सड़क और छत श्रद्धालुओं से पैक नजर आए।
बृहस्पतिवार को उपनगरी में जूना, अग्नि और किन्नर अखाड़े की पेशवाई का भव्य स्वागत हुआ। पांडेवाला स्थित छावनी में संतों के दर्शन और आशीर्वाद के लिए सुबह से ही लोगों का तांता लग गया। करीब साढ़े तीन बजे धूमधाम से पेशवाई निकली।
सड़कों और छतों पर लोग घंटों से पेशवाई का इंतजार कर रहे थे। पेशवाई निकलते ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंज उठे। भक्तों ने संतों पर फूल बरसाए तो उन्होंने भी हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया। स्वागत इतना भव्य था कि जहां से पेशवाई गुजरी पीछे सड़क पर फूलों का ढेर लग गया।
स्वामी वीरेंद्रानंद का रथ बना आकर्षण का केंद्र
वहीं गुरुवार को जूना अखाड़े की पेशवाई के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद का रथ लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। रथ के आगे उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर लोक कलाकार छोलिया नृत्य कर रहे थे। रथों पर भी गढ़वाल और कुमाऊं के लोक कलाकार नृत्य करते चल रहे थे।
जूना अखाड़ा की पेशवाई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की निराली छटा दिखी। पेशवाई में पहली बार पाल वंश राजा और शिक्षाविद् स्वामी वीरेंद्रानंद महामंडलेश्वर के रूप में शामिल हुए। रणसिंघा के साथ पेशवाई निकली तो मसकबीन, ढोल दमाऊ और हुड़का की धुन पर हाथों में तलवार थामे छोलिया कलाकार थिरकने लगे।
पीछे खड़े महामंडलेश्वर के शिष्यों ने जय उत्तराखंड और जय भारत के नारे लगाए। अनूठी रथयात्रा देख श्रद्धालु गदगद हो गए। चेहरे पर मधुर मुस्कान के साथ महामंडलेश्वर संतों को आशीर्वाद दे रहे थे। सेल्फी लेने आ रहे लोगों को सुरक्षा बलों ने बमुश्किल किनारे किया।