हरिद्वार: जूना अखाड़ा में हुआ कढ़ी पकौड़ा भंडारा, धर्मध्वजा उतारने के साथ कुंभ का विधिवत समापन  

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 18 May 2021 07:49 PM IST

सार

भगवान बदरीनाथ के कपाट खुलने पर गंगातट से मानस पूजा अर्चना कर धर्मध्वजा की तनी रस्सी को ढीली कर उतारी।
धर्मध्वजा उतारते संत
धर्मध्वजा उतारते संत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गंगा सप्तमी पर श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा में कढ़ी पकौड़ा भंडारा के साथ ही कुंभ पर्व 2021 के लिए स्थापित धर्मध्वजा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंगलवार को उतारी जाने के साथ कुंभ का विधिवत समापन हो गया। धर्मध्वजा उतारने से पूर्व धर्मध्वजा, मां गंगा और सभी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई। विशेष पूजा-अर्चना कर कोरोना महामारी से लोगों को बचाने की प्रार्थना की गई। 
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मंगलवार को श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद नंद गिरि ने श्री आनंद भैरव मंदिर महामाया अधिष्ठात्री देवी मायादेवी मंदिर में पूजा अर्चना के बाद अखाड़ा के अधिष्ठात्रा श्री दत्तात्रेय भगवान की पूजा अर्चना की। कोविड गाइडलाइन पालन के साथ कढ़ी पकौड़ा का सामूहिक भंडारा हुआ।


आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि वैश्विक महामारी के दौर में श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा ने वंचित, शोषित, अधिकार से वंचित वर्ग को बराबर का दर्जा देते हुए आगे लाने का कार्य किया है। किन्नर अखाड़े के संतों को सम्मान दिलाना सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा के संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि, अखाड़ा के सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरि निरंतर प्राणी के कल्याण और सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि जूना अखाड़ा एकमात्र धार्मिक संगठन है जो प्राणी कल्याण के साथ साथ प्रकृति के संरक्षण का कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

श्रीमहंत हरिगिरि ने कहा कि हर कुंभ पर्व का समापन गंगा सप्तमी पर होता है। इसी परंपरा के अनुसार मंगलवार को कुंभ पर्व 2021 का विधिवत समापन करते हुए धर्मध्वजा उतार ली गई है। उन्होंने कहा कि इस बार कुंभ पर्व वैश्विक महामारी की तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच संपन्न हुआ है। कुंभ का सकुशल समापन निश्चित ही देश एवं समाज के लिए कल्याणकारी होगा। सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरि ने कुंभ पर्व के विधिवत सम्पन्न होने एवं गंगा सप्तमी पर सभी के कल्याण की कामना की।

रमता पंच रवाना, 2024 कुंभ में पहुंचेंगे प्रयागराज

परंपरानुसार जूना अखाड़ा के रमता पंच हरिद्वार से खेड़ामढ़ी बरेली के लिए रवाना हो गए। पंच परमेश्वर चारों मढ़ियों के रमता पंच श्रीमहंत निरंजन भारती (चार मढ़ी) श्रीमहंत रामचंद्र गिरि (चौदह मढ़ी), श्रीमहंत शांता नंद गिरि (तेरह मढ़ी) और श्रीमहंत दूज गिरि (सोलह मढ़ी) के नेतृत्व में लाव लश्कर एवं माल असवाल के साथ दोपहर बाद शुभ मुहूर्त में कूच किया। रमता पंच देश भ्रमण करेंगे और 2024 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ में मिलेंगे। 

थानापति ने लिया आशीर्वाद
श्री आनंद भैरव मंदिर परिसर में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि का थानापति नीलकंठ गिरि ने शॉल ओढ़ाकर और माला अर्पित कर आशीर्वाद लिया। धर्मध्वजा उतारे जाने के दौरान पूर्व सभापति श्रीमहंत सोहन गिरि, श्रीमहंत उमाशंकर भारती, सचिव श्रीमहंत मोहन भारती, श्रीमहंत महेशपुरी, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि, अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि, वरिष्ठ महामंत्री श्रीमहंत केदारपुरी, लालभारती, विवेकपुरी, रकता पुरी, राजेंद्र गिरि, रणधीर गिरि, आजाद गिरि, पुजारी श्रीमहंत सुरेशानंद सरस्वती, निर्माण मंत्री श्रीमहंत शैलजा गिरि आदि मौजूद रहे।

आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण ने ली संन्यास की दीक्षा

किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने अपने दो महामंडलेश्वरों के साथ संन्यास की दीक्षा ले ली है। जूना अखाड़े के संरक्षण एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि को अपना गुरु मानते हुए उनसे दीक्षा ली। दीक्षा लेने के बाद आचार्य महामंडलेश्वर अब लक्ष्मी नारायणनंद गिरि नाम से जानी जाएंगी।

हरिद्वार कुंभ में किन्नर अखाड़े ने पहली बार जूना अखाड़ा के सहयोगी बनकर शाही स्नान किया। जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरिगिरि की पहल पर किन्नर अखाड़े को जूना का हिस्सा बनाया गया। महाकुंभ के विधिवत समापन के बाद किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण ने अपने महामंडलेश्वर भवानी शंकरानंद और पवित्रानंद के साथ मिलकर संन्यास की दीक्षा ले ली।

विधि विधान से संन्यास दीक्षा होने के बाद सभी के आगे गिरी जुड़ गया है। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायणनंद गिरि ने बताया कि सनातन धर्म में अखाड़ों की अपनी परंपराएं हैं। परंपराओं के साथ अपना गुरु चुनना होता है। जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरिगिरि उनके पिता तुल्य हैं। उन्होंने किन्नर अखाड़े के संतों को सम्मान दिया। उनको ही अपना गुरु मानकर दीक्षा ली है। दीक्षा से पहले जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि से आशीर्वाद लिया।
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