कोरोना जांच में फर्जीवाड़ा : जांचें बढ़ने से घूमता रहा मीटर, कुंभ समाप्त होने के बाद भी ले रहे थे सैंपल
कोरोना काल में कुंभ के आयोजन को लेकर काफी खींचतान चली। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड के फैलाव को देखते हुए श्रद्धालुओं के हरिद्वार आने के लिए सख्त गाइडलाइन भी लागू की।
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महाकुंभ में श्रद्धालुओं की फर्जी कोविड निगेटिव रिपोर्ट से संक्रमण दर गिरने पर पीठ थपथपाने वाले अफसरों की मुश्किलें बढ़नी तय हैं। हाईकोर्ट की फटकार के बाद नामित एजेंसी और लैबों ने कोविड जांचों की संख्या अचानक बढ़ाई। फर्जी जांचों से उनका मीटर तो घूमता रहा, लेकिन मेला प्रशासन फर्जीवाड़े से बेखबर रहा। लाखों की भीड़ के बावजूद संक्रमण दर बाकी जिलों की तुलना में कम होने पर उठने वाले सवालों को दबा दिया गया।
कुंभ में कोविड जांच फर्जीवाड़ा: आमने-सामने आए सीएम तीरथ और त्रिवेंद्र सिंह रावत, पढ़ें किसने क्या कहा
कोरोना काल में कुंभ के आयोजन को लेकर काफी खींचतान चली। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड के फैलाव को देखते हुए श्रद्धालुओं के हरिद्वार आने के लिए सख्त गाइडलाइन भी लागू की। हाईकोर्ट ने भी मेला प्रशासन से प्रतिदिन 50 हजार आरटीपीसीआर जांच करने के निर्देश दिए।
कुंभ कोविड जांच फर्जीवाड़ा: मैक्स सर्विस, लाल चंदानी और नलवा लैब पर मुकदमा दर्ज
हाईकोर्ट के आदेशों के पालन में मेला प्रशासन ने लैबों को अधिक से अधिक जांच करने का दबाव डाला। मेला अवधि में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 34 लैब जांच कर रही थीं। इनमें 11 एजेंसियों को मेला स्वास्थ्य विभाग ने नामित किया था। सभी एजेंसियों ने महाकुंभ अवधि में छह लाख से अधिक जांच कर डाली। अफसरों के दबाव से मैक्स कॉरपोरेट सर्विस, उससे संबद्ध नलवा लैब और लालचंदानी लैब के लिए मुंहमांगी मुराद मिल गई।
तीनों लैबों ने फर्जी नाम, पते और फोन नंबरों से निगेटिव रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी। एक आरटीपीसीआर जांच के 500 रुपये और एंटीजन जांच के 354 रुपये निर्धारित थे। लैब और कंपनी अपना मीटर घुुमाती रही और एक लाख फर्जी निगेटिव रिपोर्ट बनने से संक्रमण दर प्रदेश के अन्य जिलों से कम हो गई।
इससे अफसर खुद की पीठ थपथपाते नजर आए। कुछ लोगों ने संक्रमण की दर कम होने पर सवाल भी उठाए, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। शुरुआती जांच में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद लैब और कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद वही अफसर मौन हो गए हैं। शासन के आदेश पर जिलाधिकारी ने सीडीओ की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है। कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। अब देखना है कि जांच में और क्या खुलासा होता है।
कुंभ समाप्त होने के बाद भी ले रहे थे सैंपल
हरिद्वार महाकुंभ के दौरान कोविड जांच में किस तरह से अनियमितता बरती गई हैं उसकी परतें खुलने लगी हैं। शासन की ओर से कराई गई जांच में यह बात सामने आई है कि कलेक्शन फर्म मैक्स कॉरपोरेट सर्विस ने कुंभ समाप्त होने की तिथि के बाद भी हजारों एंट्री पोर्टल पर दर्ज कराई। इतना ही नहीं कम सैंपल लेकर कई गुना ज्यादा दर्शाया गया। एक फोन नंबर पर कई लोगों के नाम दर्ज किए गए।
मालूम हो कि हरिद्वार कुंभ कोविड संक्रमण के चलते सीमित कर दिया था। पहला शाही स्नान 12 और दूसरा 14 अप्रैल को हुआ था। 27 अप्रैल का स्नान सांकेतिक कराना पड़ा और 30 अप्रैल को कुंभ समापन की घोषणा की गई। मैक्स कॉरपोरेट सर्विस ने कुंभ मेला समाप्त होने के बाद भी एक से 15 मई तक 51298 एंट्री पोर्टल पर दर्ज की हैं।
जांच में सामने आया कि एक ही सैंपल नंबर की कई बार एंट्री हुई है। कुल सैंपल 27197 लेने के बाद उनको 73551 दर्शाया गया। इसके अलावा एक ही पते और फोन नंबर पर कई-कई व्यक्तियों का नाम दर्ज किए गए।
नेपाली फार्म के पते पर दिखाए 3825 लोग
जांच करने वाली लैब ने हरिद्वार जिले के बाॉर्डर स्थित नेपाली फार्म के पते पर 3825 व्यक्तियों की जांच दर्शायी है। वहीं एक फोन नंबर 7747028144 पर कुल 56 व्यक्तियों की जांच की इंट्री दर्ज कराई है।
जांच के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जिसमें कई अलग-अलग तथ्यों पर जांच की गई है। जांच में एक ही सैंपल नंबर पर कई लोगों की टेस्टिंग, फर्जी सैंपल कलेक्टर रखने जैसे खुलासे हुए हैं।
- एसके झा, सीएमओ, हरिद्वार
फर्जी निगेटिव रिपोर्ट तैयार कर किया खेल
महाकुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की कोविड जांच के लिए नामित कलेक्शन फर्म ने टेस्टिंग लैब के साथ मिलकर खेल किया। कोविड पॉजिटिव मरीजों को ही स्वास्थ्य विभाग फोन करके सूचना देता है। फर्म और लैब ने इसी का फायदा उठाकर फर्जी निगेटिव रिपोर्ट तैयार कर इंट्री की और करोड़ों का चूना लगाया। प्रारंभिक जांच में इसका खुलासा हुआ है।
महाकुंभ मेले के लिए मेला प्रशासन (स्वास्थ्य) ने मैक्स कॉरपोरेट सर्विस को कोरोना जांच कलेक्शन सेंटर बनाया था। मैक्स कंपनी ने हिसार की नलवा लैब और दिल्ली की डॉक्टर लाल चंदानी लैब के माध्यम से सैंपलों की जांच करवाई। 13 अप्रैल से 16 मई के बीच मैक्स कॉरपोरेट सर्विस ने 104796 सैंपल की एंट्री करते हुए आईडी जेनरेट की।
जबकि 95102 सैंपल लिए जाने की एंट्री पोर्टल में की थी। जिसमें पॉजिटिव मरीजों की दर मात्र 0.18 प्रतिशत दर्शाई गई थी। जबकि उस अवधि में हरिद्वार की सामान्य पॉजिटिव मरीजों की दर 5.3 प्रतिशत के आसपास थी। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि फर्म की ओर से फर्जी एंट्रियां की गईं।
करीब एक लाख सैंपल को निगेटिव दिखाया गया है। क्योंकि यदि पॉजिटिव दिखाया जाता तो विभाग पॉजिटिव आने वाले मरीज से संपर्क करता। इससे फर्म और लैब का फर्जीवाड़ा पकड़ा जाता। निगेटिव आने वाले लोगों को विभाग फोन नहीं करता।