अर्द्घकुंभ: योग नहीं बना तो फिर कैसे हो गया पहला स्नान
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इसे विचित्र संयोग ही कहा जाएगा कि गुरुवार को अर्द्घकुंभ का पहला स्नान संपन्न हो गया। लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी भी लगा ली पर न अभी गुरु कुंभ राशि में गए हैं और न सूर्य ने मेष राशि में प्रवेश ही किया है।
इन दोनों राशियों में संक्रमण के बगैर हरिद्वार में कुंभ भरता ही नहीं है। पहला स्नान संपन्न हो गया किंतु सूर्य नारायण ने तो मकर राशि तक में प्रवेश नहीं किया।
हरिद्वार कुंभ तब भरता है जब गुरु कुंभ राशि में प्रवेश कर लें और सूर्य मेषस्थ हो जाएं। वर्तमान में एक वर्ष के लिए गुरु सिंह राशि में विराजमान हैं। यही वजह है कि नासिक और उज्जैन में सिंहस्थ होने पर कुंभ भर रहे हैं।
अर्द्घकुंभ के अनुरूप नहीं बन पाई ग्रहीय स्थिति
हरिद्वार में कुंभ सजाने के लिए गुरु का कुंभ राशि में जाना और सूर्य का मेष राशि में पहुंचना अनिवार्य है। अर्द्घकुंभ तब भरता है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर लें। हकीकत यह है कि आज गुरुवार की रात तक सूर्य धनु राशि में थे।
उनका तो मकर राशि में भी रात तक प्रवेश नहीं हुआ। गुरु पहले ही सिंहस्थ चल रहे हैं। इस सब के बावजूद अर्द्घकुंभ का पहला स्नान संपन्न हो गया। इस संपन्नता के बीच ग्रहीय स्थिति अर्द्घकुंभ के अनुरूप नहीं बन पाई।
उधर, गुरुवार को मकर संक्रांति स्नान करने के बाद हजारों श्रद्घालुओं ने कुशावर्त घाट जाकर यज्ञोपवीत और मुंडन संस्कार संपन्न कराएं। मुख्य पर्व काल शुक्रवार को होने के कारण एक बार फिर से सवेरे श्रद्घालुओं की भीड़ जुटेगी। अर्द्घकुंभ स्नान करने आए श्रद्घालुओं ने भी संस्कार संपन्न कराए।
मकर संक्रांति पर स्नान के पश्चात शुभ कर्मों का विशेष महत्व है। श्रद्घालुओं ने तिल और गुड़ से बने मिष्ठान्नों का दान किया। चावल और खिचड़ी का दान भी गंगा तटों पर हुआ। शुक्रवार के दिन पर्वतीय क्षेत्रों से आए श्रद्घालु मकर संक्रांति मनाएंगे। आज स्नान करने पहुंचे श्रद्घालुओं ने संक्रांति के साथ-साथ अर्द्घकुंभ का पहला स्नान भी किया।