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देहरादून: जेनी के आरोपों पर हरक सिंह का पलटवार, बोले-अंकिता प्रकरण से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा की साजिश

Sat, 07 Nov 2026 05:06 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 07 Nov 2026 05:06 PM IST
सार

पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत ने जेनी प्रकरण को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा एक साजिश के तहत जेनी प्रकरण को सामने ला रही है।

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Harak singh rawat address media after jenny allegations calls them a conspiracy jenny controversy uttarakhand
कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की प्रेसकांफ्रेंस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

23 साल पुराने जेनी प्रकरण में महिला के सामने आने और गंभीर आरोप लगाने के बाद अब कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत भी मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोपों को भाजपा की साजिश बताते हुए कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण से ध्यान भटकाने के लिए यह सब किया जा रहा है। हरक ने कहा कि जिस मामले में न्यायालय का फैसला आ चुका है, उस पर दोबारा टीका-टिप्पणी करना उचित नहीं है।

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प्रेसकांफ्रेंस में हरक सिंह रावत ने कहा कि जेनी प्रकरण में पहले ही सीबीआई जांच और डीएनए जांच हो चुकी है। उस समय भी जेनी ने उन पर आरोप लगाए थे। मामले की जांच के बाद न्यायालय ने फैसला सुनाया था और जांच रिपोर्ट को अनुमोदन दिया था। ऐसे में अब इस पर सवाल उठाना न्यायालय की अवमानना है।

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उन्होंने कहा कि यदि किसी को जांच या उसके निष्कर्षों पर आपत्ति थी तो उसे उसी समय सामने रखना चाहिए था। अब इतने समय बाद इस मामले को फिर क्यों उठाया गया। उन्होंने इसे भाजपा की बौखलाहट और साजिश करार दिया। हरक सिंह रावत ने यह भी कहा कि उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ वह कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी प्रयास को लेकर वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।


सीएम धामी समेत कई पर मानहानि का मुकदमा करूंगा

कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान हरक सिंह रावत ने कहा कि इस मामले में वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और कुछ सोशल मीडिया पत्रकारों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे। पूर्व मंत्री ने जेनी प्रकरण की सीबीआई जांच का जिक्र करते हुए कहा कि जिस समय इस मामले की जांच हुई थी, उस दौरान केंद्र में भाजपा की सरकार थी।

उन्होंने कहा कि अब भाजपा की ओर से इस प्रकरण को उठाया जा रहा है। ऐसे में उस समय केंद्र में रही अटल बिहारी वाजपेयी सरकार पर भी सवाल उठते हैं। हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे को उठाकर प्रदेश के दूसरे महत्वपूर्ण मामलों से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगे।

 

 

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मंत्री पद गंवाना पड़ा था।

वर्ष 2003 में स्व. एनडी तिवारी की सरकार में हरक सिंह को चर्चित जेनी प्रकरण की वजह से मंत्री पद गंवाना पड़ा था। उस वक्त जेनी नाम की महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया था। जेनी ने हरक सिंह रावत पर आरोप लगाते हुए कहा था कि हरक सिंह रावत ही उसके बच्चे के पिता हैं। मामले में डीएनए टेस्ट भी कराया गया था।




अब एक बार मामले ने तूल पकड़ लिया है। जेनी प्रकरण में देहरादून पहुंची महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने पूर्व में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। इस दौरान वह भावुक भी हो गई।

महिला ने बताया कि वह अक्तूबर 2002 में देहरादून आई थी। उस समय उसकी उम्र 16 साल थी। उसने कहा कि वह यमुना कॉलोनी में करीब दो महीने रही थी। महिला का आरोप है कि पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने कहा कि हरक सिंह रावत उस समय सत्ता में थे और उनके प्रभाव के चलते उसे कहीं से मदद नहीं मिली।

बेटे का टेस्ट ही नहीं हुआ
महिला ने आरोप लगाया कि उसे पागलखाने में डाल दिया गया था। वह गर्भवती थी और उसके साथ बहुत कुछ हुआ, लेकिन किसी ने उसका साथ नहीं दिया। उसने कहा कि उसे धमकाकर वहां से बाहर निकाल दिया गया और जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, उसने कर दिए। महिला के मुताबिक, सीबीआई की टीम उससे पागलखाने में मिलने केवल एक बार आई थी।

ये भी पढे़ं...जेनी प्रकरण विवाद: 23 साल बाद महिला के खुलासे से बढ़ी हलचल, हरक सिंह पर लगाए गंभीर आरोप, डीएनए टेस्ट की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने कहा कि उसे हिंदी नहीं आती थी और उसके साथ जो हुआ, वैसा किसी और के साथ नहीं हुआ होगा। उसने मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराने और डीएनए टेस्ट फिर से कराने की मांग की। उसका सवाल था कि जब उसके बेटे का टेस्ट ही नहीं हुआ तो डीएनए टेस्ट कैसे हुआ? उसने कहा कि उसके बेटे को अपने पिता का नाम चाहिए।

महिला ने बताया कि जब मुख्यमंत्री ने उसका नाम लिया, तब उसने देहरादून आने का फैसला किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वह कई बार भावुक हुई और अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी।

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