देश के अंतिम गांव में बनेगा हस्तशिल्प और वास्तुकला संग्राहलय, दिखेगी उत्तराखंडी संस्कृति की झलक
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उत्तराखंड के चमोली जनपद के सीमांत गांव माणा में हथकरघा उद्योग और पारंपरिक विकास को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस है। क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को हस्तशिल्प, वास्तुकला और स्थानीय संस्कृति के दर्शन कराने के लिए माणा में एक संग्रहालय तैयार किया जाएगा। जहां पर बुनकरों द्वारा प्रयोग की जाने वाली पारंपरिक मशीनों, वास्तुकला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
बुधवार को सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग, पर्यटन विभाग के अधिकारियों और जिलाधिकारी चमोली के साथ प्रदेश में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने और माणा गांव के पारंपरिक विकास पर चर्चा की।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय बुनकरों को उत्तम गुणवत्ता की ऊन उपलब्ध कराने के लिए अच्छी प्रजाति की भेड़-बकरी पालन को प्रोत्साहित करें। ऊन रिफाइन करने के लिए मशीनें शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं।
जिससे बुनकरों को ग्रेडेड ऊन प्राप्त हो सके। मुख्य सचिव ने कहा कि पारंपरिक डिजाइन के साथ ही अच्छे व नए डिजाइन उपलब्ध कराने के लिए बुनकरों को तकनीकी सहायता दी जाए। उन्होंने विभाग को निर्देश कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगारपरक योजनाएं तैयार की जाएं।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी को माणा गांव की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए स्थानीय लोगों से सुझाव लेकर प्रस्ताव तैयार किए जाएं। स्थानीय पारंपरिक परिधानों और आभूषणों को भी प्रोत्साहन देने के लिए योजना बनाई जाए। बैठक में जिलाधिकारी चमोली ने माणा में स्थानीय लोगों को दुकानें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा।
इस पर मुख्य सचिव ने दुकानों के निर्माण में स्थानीय वास्तुकला का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। इस मौके पर प्रमुख सचिव मनीषा पंवार एवं अपर सचिव पर्यटन सोनिका व अन्य अधिकारी मौजूद थे।