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Haldwani violence: रुद्रपुर में अलर्ट....एसएसपी के निर्देश पर भी नहीं हटाए घर की छतों से ईंट-पत्थर, केस दर्ज

Sat, 10 Feb 2024 11:07 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रपुर। Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 10 Feb 2024 11:07 PM IST
सार

Haldwani Violence: सीरगोटिया में दो घरों की छतों पर ईंट-पत्थरों के ढेर के साथ 10 से 15 लोग एकत्र मिले थे। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने दोनों घरों के मकानमालिकों बुद्धन खां और शाहनवाज उर्फ सोनू को नोटिस थमाया था। दोनों को तीन घंटे में ईंट-पत्थर हटाने के निर्देश दिए थे।

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Haldwani violence: Alert in Rudrapur stock of bricks and stones found on roofs of two houses case registered
Haldwani Violence - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने दो मकान मालिकों के खिलाफ बलवा करवाने की कोशिश के आरोप में केस दर्ज किया है। दोनों के घरों की छतों पर ड्रोन से निगरानी के दौरान ईंट-पत्थरों का जखीरा मिला और इंस्पेक्टर के निर्देश के बावजूद उसे हटाया नहीं गया।

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शुक्रवार को जिलेभर की पुलिस हाई अलर्ट पर थी। रुद्रपुर में संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी भी की गई थी। इस दौरान सीरगोटिया में दो घरों की छतों पर ईंट-पत्थरों के ढेर के साथ 10 से 15 लोग एकत्र मिले थे। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने दोनों घरों के मकानमालिकों बुद्धन खां और शाहनवाज उर्फ सोनू को नोटिस थमाया था। दोनों को तीन घंटे में ईंट-पत्थर हटाने के निर्देश दिए थे।

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पुलिस के अनुसार एसआई नवीन बुधानी ने टीम के साथ दोबारा घरों की छत की जांच पड़ताल की तो वहां से ईंट-पत्थर नहीं हटाए गए थे। मकान स्वामियों ने लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन किया। बताया कि ईंट- पत्थर नहीं हटाए जाने से लग रहा है कि वह घर पर लोगों को एकत्र कर बलवा कराने की कोशिश कर रहे हैं। एसआई नवीन बुधानी की तहरीर पर पुलिस ने शाहनवाज उर्फ शानू और बुद्धन खां के खिलाफ धारा 153, 188, 148, 511 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया है।

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रातभर सड़कों और संवेदनशील इलाकों में दौड़ते रहे पुलिस के वाहन

हल्द्वानी में हुई हिंसा को लेकर काशीपुर, बाजपुर और जसपुर क्षेत्र में पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। पुलिस-प्रशासन ने शांति व्यवस्था के मद्देनजर संवेदनशील क्षेत्रों के अलावा प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल तैनात रखा। साथ ही रातभर पुलिस ने क्षेत्र में वाहनों से गश्त कर लोगों को समय से घर जाने की अपील की।कोतवाली प्रभारी मनोज रतूड़ी ने बताया कि क्षेत्र के अलावा संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के माध्यम से सर्च अभियान चलाया गया। इस दौरान देखा गया कि कहीं किसी छत पर ईंट-पत्थर तो एकत्र नहीं हैं। फिलहाल सर्च में ऐसा कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। वहीं सीओ अनुषा बडोला ने बताया कि क्षेत्र के यूपी बॉर्डर पर सघन चेकिंग चल रही है। पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है साथ ही संदिग्धों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

बाजपुर में भी सतर्क रहा पुलिस प्रशासन

बाजपुर। क्षेत्र में शनिवार को पुलिस-प्रशासन चौकस है। यूपी बॉर्डर पर पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। आने जाने वाले वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। वाहनों की तलाशी भी ली गई। नगर क्षेत्र में भी मुख्य स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा। केलाखेड़ा क्षेत्र में पुलिस की गश्त रही। संवाद

हल्द्वानी हिंसा से रोडवेज को रोज लग रही 35 हजार रुपये की चपत

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई हिंसा के बाद काशीपुर से हल्द्वानी जाने वाली बसों का संचालन प्रभावित हो गया है। इससे काशीपुर डिपो को रोजाना करीब 30-35 हजार रुपये की चपत लग रही है। हल्द्वानी में अवैध अतिक्रमण को हटाने को लेकर हुई हिंसा के बाद क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गई थी जिसके बाद से आवश्यक सेवाओं के अतिरिक्त अन्य सभी सेवाएं बंद हैं। इसी के साथ हल्द्वानी डिपो से बसों का संचालन भी प्रभावित है।

वहीं काशीपुर और अन्य डिपो की बसें भी हल्द्वानी नहीं जा पा रही हैं। काशीपुर डिपो से हल्द्वानी के लिए रोजाना तीन बसें जाती थीं जिसमें जसपुर-रुद्रपुर-हल्द्वानी सुबह साढ़े पांच बजे, काशीपुर-बाजपुर-हल्द्वानी 7:30 बजे और काशीपुर-रुद्रपुर-हल्द्वानी 8:30 बजे जाती थी। रोडवेज बस काशीपुर से हल्द्वानी करीब ढाई घंटे में पहुंच जाती है। यही कारण है सुबह 5:30 बजे की बस से नौकरीपेशा लोग यात्रा करते है। अब हल्द्वानी में धारा 144 लगी है इसलिए इन बसों को मार्ग पर नहीं भेजा जा रहा है।

काशीपुर डिपो से तीन बसों का संचालन हल्द्वानी के लिए होता था। लेकिन कर्फ्यू के बाद हल्द्वानी रूट पर बसों को न भेजने का आदेश आया है। प्रत्येक बस रोजाना आठ से 12 हजार की आय अर्जित करती थी। आगे के आदेश तक रूट पर बसों का संचालन बंद रहेगा। - हरेंद्र सिंह नितवाल, वरिष्ठ डिपो प्रभारी, काशीपुर

प्राइवेट बसें नहीं हुईं प्रभावित

आवास विकास स्थित निजी बस स्टॉप से निजी बसें वाया बाजपुर-कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी जाती हैं। हल्द्वानी में हुई हिंसा को लेकर निजी बसों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। बस यूनियन के अमृत सिंह लहरी ने बताया कि रोजाना 25 से 30 बसों का संचालन होता है। वर्तमान में भी संचालन हो रहा है पर सवारी कम हैं। बसें कुसुमखेड़ा तक जा रही हैं।

हल्द्वानी में सवारी छोड़कर लौटी एक रोडवेज बस

काशीपुर। कालाढूंगी-दिल्ली मार्ग पर जाने वाली एक बस शनिवार को हल्द्वानी होकर भी आई। चालक सुखचैन ने बताया कि दिल्ली से सवारियां लेकर वह कालाढूंगी फिर हल्द्वानी पहुंचा जहां डिपो में कुछ सवारियां उतारी और बैठाई। बताया कि ज्यादा देर रुकने से मना कर दिया गया। 

हल्द्वानी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण

बाजपुर। सपा यूथ बिग्रेड के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद यादव ने कहा कि हल्द्वानी में हुई हिंसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। देवभूमि उत्तराखंड के इतिहास में इस तरह की हिंसात्मक घटना पहली बार हुई है। अचानक इतने बड़े पैमाने पर हिंसा का फैलना, हिंसा के कारणों और उससे उत्पन्न हुई परिस्थिति की निष्पक्ष जांच की जरूरत है। कहा कि भाजपा के लोग चुनावी लाभ लेने के लिए संपूर्ण देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंकना चाहते हैं। उन्होंने घटना में पुलिस, पत्रकार, नगर पालिका के अधिकारी, कर्मचारी जो भी घायल हुए हैं। उन्हें पांच-पांच लाख का मुआवजा देने की मांग की है। 

हल्द्वानी हिंसा की उच्चस्तरीय जांच हो : अली अनवर

जमियत उलमा हिंद काशीपुर के महासचिव अली अनवर ने जारी विज्ञप्ति के माध्यम से सरकार से मांग की कि 8 फरवरी को हल्द्वानी में हुई हिंसा की जांच उच्च स्तरीय जांच समिति बनाकर होनी चाहिए। जांच समिति में सेवानिवृत्त जजों को भी शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि प्रशासन और सरकार के गुप्तचर विभागों को होने वाले हिंसा की कैसे भनक नहीं लगी। अतिक्रमण को हटाने का समय शाम पांच बजे ही क्यों तय किया था। हिंसा में कौन लोग शामिल थे इसकी जांच होनी चाहिए। क्योंकि सिर पर पहनने वाली टोपी और बुरखा बाजार में आसानी से उपलब्ध होते हैं। दंगाइयों को भगाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं और फिर हवाई फायरिंग करने का प्रावधान है, लेकिन शुरुआती दौर में ही फायरिंग के आदेश दिए गए। ऐसा ही किसानों के आंदोलन की भीड़ को इसी तरह काबू किया गया था। उन्होंने आमजन से शांति बनाने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। 

हल्द्वानी हिंसा में घायल पर्यावरण मित्रों का हो निशुल्क इलाज

जसपुर। उत्तरांचल स्वच्छकार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राम अवतार राजौर एवं महामंत्री महेंद्र सिंह राही ने सीएम को पत्र भेजकर हल्द्वानी हिंसा में घायल पर्यावरण मित्रों का निशुल्क इलाज कराने एवं उनकी सुरक्षा करने की मांग की है। कहा कि हल्द्वानी के थाना बनभूलपुरा क्षेत्र में नगर निगम प्रशासन की ओर से चिह्नित अतिक्रमण हटाने एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई दौरान विरोध में हुए पथराव में घायल कुछ पर्यावरण मित्रों की हालत गंभीर बनी है। उन्होंने सभी पर्यावरण मित्रों के समुचित इलाज का पूरा खर्च सरकार से वहन करने की मांग की। संघ के प्रदेश महामंत्री महेंद्र सिंह राही ने सभी पर्यावरण मित्रों से कहा कि किसी भी पर्यावरण मित्र को घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी हर एक परेशानी में उत्तरांचल स्वच्छकार कर्मचारी संघ उनके साथ खड़ा है। संवाद

बवाल और पत्थरबाजी करने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई

गदरपुर। हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई हिंसा के विरोध में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने सीएम को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शनिवार को जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सैनी के नेतृत्व में कार्यकर्ता तहसील मुख्यालय पहुंचे और एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। कहा बनभूलपुरा में जिस प्रकार से पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के ऊपर हमला किया गया, वह क्षमा योग्य नहीं है। आरोपियों के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज हो और आगजनी में संपत्ति को हुए नुकसान की आरोपियों से भरपाई की जाए। वहां निपुण गगनेजा, डाॅ. विनोद शर्मा, अमित सेतिया, सर्वेश सैनी, शंकर सिंह, सोनू सैनी, राजपाल सिंह, विपुल प्रजापति आदि मौजूद थे।

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हिंसा की अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से जांच कराने की मांग

रुद्रपुर। इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन व प्रगतिशील महिला एकता संगठन के शहर सचिव दिनेश चंद्र, शिवदेव सिंह और वंदना ने सुप्रीम कोर्ट से अवकाश प्राप्त न्यायाधीश के नेतृत्व में कमेटी का गठन कर बनभूलपुरा में हुए बवाल की जांच की मांग की है। उन्होंने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बनभूलपुरा का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। 14 फरवरी को इस पर सुनवाई होनी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी अग्रिम आदेशों तक के लिए अतिक्रमण ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई है। लेकिन शासन प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों का इंतजार करने के बजाय जल्दबाजी की जो निंदनीय है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी बनाने, नैनीताल के डीएम, एसएसपी, एसडीएम व सिटी मजिस्ट्रेट का जिले से तत्काल स्थानांतरण करने की मांग की। कहा कि हिंसा ग्रस्त क्षेत्र में सब्जी, राशन व दूध उपलब्ध कराया जाए। संवाद

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