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Dehradun News: एक्सरसाइज और फैक्टर की मदद से अपने पैरों पर चल रहे हीमोफीलिया पीड़ित बच्चे

Wed, 17 Apr 2024 05:57 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2024 05:57 AM IST
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Haemophilia suffering children walking on their feet with the help of exercise and factors
विश्व हीमोफीलिया दिवस पर विशेष
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देहरादून। 11 वर्षीय हीमोफीलिया से पीड़ित अर्जुन का इलाज ऋषिकेश एम्स में चल रहा है। अर्जुन ने डॉक्टर से पूछा कि तीन महीने बाद मेरी बहन की शादी है। क्या मैं अपनी बहन की शादी में डांस कर सकूंगा। मेरे पैरों में बहुत दर्द है और चल नहीं पा रहा हूं। डॉक्टर ने अर्जुन को सही समय पर फैक्टर लेने और एक्सरसाइज करने को कहा। उसके बाद से अर्जुन काफी राहत महसूस कर रहा है।

हीमोफीलिया सोसाइटी देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष व श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल के सर्जन डॉ. जेपी शर्मा ने बताया कि हीमोफीलिया एक जेनेटिक बीमारी है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में होती है। हालांकि, कुछ केस में जींस के म्यूटेशन की वजह से यह पहली बार भी देखने को मिलती है। हीमोफीलिया पीड़ित व्यक्ति के खून में फैक्टर की कमी होने के कारण खून का थक्का बनने में परेशानी आती है। इस कारण रक्तस्राव होता रहता है। यह रक्तस्राव आंतों या सिर से हो तो जानलेवा हो सकता है। जोड़ों में समस्या होने पर उचित इलाज न मिले तो व्यक्ति विकलांग हो सकता है। हीमोफीलिया पीड़ित व्यक्ति को सही समय पर फैक्टर लेना और एक्सरसाइज भी करना चाहिए। बच्चों को हीमोफीलिया के साथ जीना है और इससे जीतना भी है।
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देहरादून जिले में कोई हेमेटोलॉजिस्ट
हीमोफीलिया सोसाइटी देहरादून चैप्टर के महासचिव दीपक सिंघल ने बताया कि 2024 में विश्व हीमोफीलिया दिवस की थीम ‘सभी के लिए समान पहुंच : सभी रक्तस्राव विकारों को पहचानना’ है। दीपक ने बताया कि उत्तराखंड में 292 बच्चे और देहरादून जिले में 45 हीमोफीलिया बच्चे रजिस्टर्ड हैं। हालांकि, देहरादून जिले में कोई हेमेटोलॉजिस्ट नहीं हैं। बच्चों का इलाज फिजीशियन या बाल रोग विशेषज्ञ करते हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों को ऋषिकेश एम्स भेजा जाता है।
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कोरोनेशन में उपलब्ध हैं फैक्टर

दीपक सिंघल ने बताया कि हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों के लिए फैक्टर कोरोनेशन अस्पताल में उपलब्ध हैं। हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों के लिए पिछले दिनों फैक्टर खत्म हो गए थे। इसके लिए सरकार से मांग की गई। फैक्टर उपलब्ध तो हो गए लेकिन दूर-दराज के इलाकों में कमी बनी हुई है।



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सीजीएचएस आईडी को आभा से लिंक करने की तारीख बढ़ी

देहरादून। सीजीएचएस आईडी को आभा से लिंक किया जाना सरकार ने अनिवार्य किया है। जिसका समय 30 अप्रैल से बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है। दून केंद्रीय पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रवींद्र सेमवाल और महासचिव एसएस चौहान ने बताया कि पेंशनर्स इसे लिंक करने से घबराएं नहीं। मंगलवार को दोनों ने सीजीएचएस जोनल इंचार्ज एवं अपर निदेशक डॉ. जानकी जंगपांगी से उनके कार्यालय में मुलाकात की। उनसे कहा कि भविष्य में मामले में सरकार यदि सीजीएचएस सेवा में कटौती करने का प्रयास करती है तो संगठन पुरजोर विरोध करने से पीछे नहीं हटेगा। अपर निदेशक ने उक्त आईडी लिंक ना होने की दशा में सीजीएचएस मरीजों का कैशलेस इलाज बंद न करने की हिदायत निजी अस्पताल को दी है।
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