बड़ गई H1N1 की ताकत, रखें अपना ख्याल
गर्म मौसम में भी स्वाइन फ्लू का वायरस सक्रिय है। अस्पतालों में अब भी स्वाइन फ्लू से पीड़ित और संदिग्ध मरीज पहुंच रहे हैं।
डॉक्टर इसे वायरस के मिजाज में बदलाव के संकेत मान रहे हैं। ऐसे में डाक्टर लापरवाही न बरतने की सलाह दे रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वाइन फ्लू का एच1एन1 वायरस अमूमन तीस डिग्री तापमान के आसपास पहुंचने पर निष्क्रिय होने लगता है। पिछले कुछ दिन से दून का तापमान तीस डिग्री के आसपास है, लेकिन संदिग्ध मरीज लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं।
रविवार को ही स्वाइन फ्लू से पीड़ित एक महिला की मौत हुई है। जबकि शनिवार को मृत एक अन्य मरीज में निजी लैब ने स्वाइन फ्लू की पुष्टि की है। 20 मार्च को सात मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी।
बदली रहती है स्वाइन फ्लू के वायरस की क्षमता
सोमवार को भी स्वाइन फ्लू के लक्षणों वाले पांच नए मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली भेजे। इनमें तीन मरीज हिमालयन इंस्टीट्यूट अस्पताल जौलीग्रांट और दो मरीज दून अस्पताल में भर्ती हैं। दून अस्पताल में रविवार देर रात स्वाइन फ्लू के लक्षणों वाले एक बच्चे को भर्ती किया गया है।
दून अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एसडी जोशी के मुताबिक स्वाइन फ्लू के वायरस की क्षमता अक्सर बदलती रहती है। इस वजह से स्वाइन फ्लू की निर्धारित दवाएं भी कई बार बेअसर हो जाती हैं। राजस्थान में गर्मी है फिर भी मरीज बढ़ रहे हैं।
सीएमआई अस्पताल के स्वाइन फ्लू नियंत्रण अधिकारी डॉ. रामेश्वर पांडेय बताते हैं कि गर्मी बढ़ने पर एच1एन1 वायरस की सक्रियता कम हो जाती है। कई बार एक बड़े अंतराल में वायरस की प्रवृत्ति बदल सकती है।