जहां गूंजती थी जिंदगी, वहां जिंदा इंसानों की 'कब्रें'
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जिस घर के आंगन में कभी नन्हीं परियों की आवाज गूंजती थी, वहां पर मलबे में जिंदा इंसानों की कब्रें बन गईं। लोगों का रुदन चारों ओर गूंज रहा है।
30-31 जुलाई की रात को आए जलप्रलय ने नौताड़ तोक के कई परिवारों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। इन्हीं में से एक परिवार विनोद नौटियाल का है।
उसके आंखों के सामने हंसता-खेलता परिवार मलबे में दफन हो गया। लाचार विनोद प्रकृति के रौद्र रूप के सामने कुछ भी नहीं कर पाया। गांव के लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो पलभर में उनके पूर्वजों की निशानी मटियामेट हो गई।
घनसाली-केदारनाथ मोटर मार्ग पर घनसाली से 5 किलोमीटर आगे ग्राम पंचायत जखन्याली के नौताड़ तोक में रात 2.15 मिनट पर बादल फटने की खबर सुनकर जब यह संवाददाता सुबह पौने दस बजे मौके पर पहुंचा तो सामने का मंजर देखकर दिल दहल उठा।
मलबे में अपनो को ढूढ़ रहे थे लोग
वैसे उसका परिवार घनसाली में ही रहता था। विनोद को सुबह मलबे से घायल अवस्था में निकाला गया। उसके शरीर का पेट से नीचे का हिस्सा काम नहीं कर रहा है। इसी बीच दूसरी ओर चीख पुकार सुनाई दी। मैं उधर दौड़ा।
पचास वर्षों में नहीं दिखा ऐसा रौद्र रूप
देखा तो पुलिस का एक जवान छोटी बच्ची का शरीर हाथ पर लिए हुए था। यह विनोद की बेटी देवू (8) थी। मैं गांव की तरफ गया, तो वहां पर ताल गांव की 60 वर्षीय कुशला देवी मिली।
मुलाकात में बताया कि 50 वष्रों में जखन्याली गदेरे का इतना रौद्र कभी नहीं देखा। गांव के रामानुज मिले तो उन्होंने बताया कि रात को घटना के वक्त चारों तरफ अंधेरा था। सिर्फ लोगों की चीख पुकार सुनाई दे रही थी।
लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। इस घटना में विनोद की पत्नी कमलेश देवी, पुत्री देवू, रीतिका दफन हो गई है। इस दौरान मौके पर डीएम युगल किशोर पंत और पुलिस अधीक्षक मुख्तार मोहसिन सुरक्षा बलों को दिशा-निर्देश दे रहे थे।
लोगों को बचाने वाला खुद हुआ मलबे में गुम
बादल फटने के बाद गांव के लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकालते-निकालते खुद कहीं मलबे में खो गया। रात में जब राजेश बाहर आया तो देखा कि नैलचामी गाड में पानी का स्तर काफी बढ़ा हुआ है।
अनहोनी का अंदेशा होने पर गांव में जाकर जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया। उसकी आवाज सुनकर कई लोग घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों पर भागे, लेकिन लोगों मौत के मुंह से बाहर निकालने वाला खुद को नहीं बचा सका।
अब तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। राजेश नौताड़ गांव में ग्राम प्रहरी के रूप में कार्यरत है। उसकी पत्नी आशा देवी और 75 वर्षीय पिता सुंदर लाल की आंखें राजेश को मलबे के ढेर में ढूंढ रही हैं, लेकिन कोई सुराग नहीं लग पाया है। राजेश के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।