फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   ground report of bhuwan chandra khanduri village

देश को सड़कों से जोड़ने वाले नेता के गांव में सड़क नहीं

Wed, 23 Apr 2014 09:44 AM IST
श्रीराधा बल्लभपुरम से बृज मोहन खर्कवाल
श्रीराधा बल्लभपुरम से बृज मोहन खर्कवाल Updated Wed, 23 Apr 2014 09:44 AM IST
विज्ञापन
ground report of bhuwan chandra khanduri village

चार महानगरों के जरिये लगभग पूरे देश को सड़कों से सफलता पूर्वक जोड़ने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का अपना गांव ही सड़क से नहीं जुड़ पाया है।

विज्ञापन


गांव के पैदल रास्ते भी कच्चे और जोखिम भरे हैं। इसी से यहां विकास का हाल पता लगता है।

रोचक तथ्य यह कि गांव का नाम मरगदना से बदलकर राधाबल्लभपुरम रख दिया गया है, जो किसी आधुनिक कॉलोनी का बोध कराता है, लेकिन नाम के अतिरिक्त यहां कुछ भी नहीं बदला है।
विज्ञापन


सुबह सभी लोग मिल जाएंगे। इसी मकसद से अमर उजाला के पत्रकार बृज मोहन खर्कवाल अपने फोटो पत्रकार मुकेश आर्य के साथ मरगदना की हकीकत जानने निकल पड़ा। जानें, उनकी जुबानी गांव की हकीकत...
विज्ञापन
विज्ञापन


सवा सात बजे हम पौड़ी बस स्टेशन में आकर पौड़ी से श्रीनगर जाने वाली जीएमओयू की बस में बैठ गए। सवारियां पूरी नहीं थी। हमें आधा घंटा इंतजार करना पड़ा। पौने आठ बजे बस रवाना हुई।

ठीक 8.15 मिनट में लगभग 15 किमी का सफर तय करके हम मरगदना तक पहुंच गए। सड़क के किनारे एक कच्चा ढाबा है।

मार्ग के दाहिनी ओर कुछ दूर ऊपर एक मंदिर है। हमने सड़क किनारे स्थित ढाबे में चाय बना रहे धीरेंद्र रावत से गांव के बारे में जानकारी ली। रावत ने ऊपरी तरफ बने मंदिर की ओर इशारा किया।

यहां पर था भुवन चंद्र खंडूड़ी का घर

ground report of bhuwan chandra khanduri village

उसने बताया कि भाजपा प्रत्याशी खंडूड़ी जी का घर पहले यहीं पर था। बुजुर्ग बताते हैं कि पहले कभी यहां पठाल का एक मकान था। अब यहां पर मंदिर बना गया दिया है। मंदिर में पुजारी रहता है।

डोभ ग्राम पंचायत में आने वाला यह राजस्व गांव पहले मरगदना के नाम से जाना जाता था। अब इसका नाम राधाबल्लभपुरम हो गया है। इसके अंतर्गत चक्कीधार, मवांण और मोलस्यूं तीन तोक आते हैं जो सड़क से काफी ऊपर बसे हैं।

सड़क के ऊपर बने मंदिर में सन्नाटा पसरा था। मंदिर से बगल के रास्ते से हमने राधाबल्लभपुरम के अंतर्गत आने वाले चक्कीधार, मवांण और मोलस्यूं तोकों तक पहुंचने के लिए चढ़ाई शुरू कर दी।

सड़क से लगभग एक किमी ऊंचाई तक रपटीली, जोखिमभरी पगडंडियों पर दम फुलाने की चढ़ाई चढ़ने बाद इन गांवों की दुश्वारी का अंदाजा हुआ। मरगदना से राधाबल्लभपुरम गांव के इन तोकों में जाने के लिए सड़क तो दूर पैदल मार्ग तक नहीं है।

चिकित्सा सुविधा ने होने से पलायन

ground report of bhuwan chandra khanduri village

चिकित्सा सुविधा होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐसे हालात में अधिकांश लोग बाहर पलायन कर चुके है। इनमें गिने-चुने परिवार ही यहां रह गए हैं।

बीच में एक जगह मनरेगा से पैदल मार्ग निर्माणाधीन है। यह सिर्फ 20-25 मीटर ही बना है। फिलहाल काम बंद पड़ा है। रास्ते में मिले पोखरी गांव निवासी जयपाल सिंह मिले।

उलाहना भरे स्वर में कहते हैं कि खंडूड़ी जी ने देश-दुनिया में तो अच्छा नाम कमाया लेकिन अपने गांवों में जाने तक पैदल मार्ग तक नहीं बनवा पाए।

सात सौ मीटर की चढ़ाई पर पहले चक्कीधार तोक पड़ता है। इसमें चार सजवाण परिवार हैं। जिनमें से एक परिवार पौड़ी रहता है। जो कभी कभार गांव आता है।

यहां रह रहे इन परिवारों ने गाय व भैंस भी पाले हुए हैं। कुछ खेतों में फसलें भी दिखी। जंगली जानवरों के डर से अधिकांश खेत परती हैं।

मंवाण तोक का हाल इससे अलग नहीं है। यहां सिर्फ दो परिवार रह रहे हैं। जिनमें एक परिवार चैत राम खंडूड़ी का परिवार दूसरा लीलानंद खंडूड़ी का परिवार है।

इन्होंने खेती करने के साथ ही मवेशी भी पाले हैं। ये परिवार को खुद को भाजपा प्रत्याशी खंडूड़ी के परिवार से संबंधित बताते हैं।

कई साल पहले गांव में आए थे खंडूड़ी

ground report of bhuwan chandra khanduri village

सत्तर वर्षीय चैतराम खंडूड़ी और 58 वर्षीय लीलाधर खंडूड़ी कहते हैं कि उनके दादा-परदादा और बीसी खंडूड़ी के दादा-परदादा भाई थे।

बताते हैं उनके दादा लोग पहले नीचे रहते थे। लेकिन बाद उनके पूर्वज ऊपर आकर बस गए। इन दो परिवारों का कहना है कि उसने संबंधित आठ परिवार बाहर रह रहे हैं।

इससे ऊपर बने मोलस्यूं तोक के मकान में भी सिर्फ एक परिवार रह रहा है। चार परिवार बाहर शिफ्ट हो गए हैं। एक जामणाखाल में चला गया है।

मंवाण और चक्कीधार के लोग बताते हैं कि खंडूड़ी कई साल इन गांवों में आए थे, अलबत्ता, मरगदना में बने मंदिर में पूजा-पाठ करने आते हैं।

यहां तक तक सड़क बनाने की कार्रवाई सर्वे तक सिमट कर रह गई। पहले मरगदना में एक आयुर्वेदिक और एक होम्योपैथिक सब-सेंटर था जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गया। मरीजों के इलाज के लिए 15 किमी दूर पौड़ी जाना पड़ता है।

15 विद्यार्थियों को पढ़ा रहीं चार शिक्षिकाएं

ground report of bhuwan chandra khanduri village

सड़क से करीब दो सौ मीटर ऊपर एक कन्या जूनियर हाईस्कूल है। वर्तमान में यहां 15 छात्र-छात्राएं हैं। इनमें नेपाली मूल के पांच विद्यार्थी हैं।

स्कूल में डोभ ग्राम पंचायत का छात्र नहीं है। चार शिक्षिकाओं का स्टाफ है। सहायक शिक्षिका दमयंती कहती हैं कि भले यह विद्यालय राधाबल्लभपुरम में है लेकिन यहां इस गांव का एक भी विद्यार्थी नहीं है।

गोथला रेवड़ी तल्ली और उदाल्टियू के विद्यार्थी यहां पढ़ रहे हैं।

गांव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधा की कमी के साथ-साथ रोजगार का अभाव है। जिसके कारण कई परिवार बाहर रह रहे हैं।हाईप्रोफाइल खंडूड़ी का पैतृक गांव होने के बाद भी लोगों को दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
- चैतराम खंडूड़ी निवासी मवांण गांव

गांव में सड़क न होने से राशन, रसोई गैस आदि लाने में काफी परेशानियां होती है। गांव में किसी की तबियत खराब होने पर उसे उपचार हेतु बाहर ले जाने के लिए सड़क तक पहुंचाने में काफी चुनौतियां झेलनी पड़ती है। जंगली जानवरों के भय से अब खेती करना मुश्किल हो गया है।
- सोहन सिंह सजवाण निवासी चक्कीधार

मरगदना से राधा बल्लभपुरम गांव के अंतर्गत पड़ने वाले उक्त तोकों तक पैदल मार्ग बनाने हेतु कार्य चल रहा है। उक्त तोकों के लिए दूसरी जगह से गांव तक जाने के लिए पैदल मार्ग है। कलढुंग के लोग सड़क निर्माण हेतु जमीन नहीं दे रहे हैं। जिससे चक्कीधार, मवांण आदि तोकों तक सड़क नहीं बन पा रही है।
- धीरेंद्र डोभाल, निवर्तमान प्रधान डोभा विकास खंड पौड़ी गढ़वाल

अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी योजना की शुरुआत

ground report of bhuwan chandra khanduri village

एनडीए सरकार में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2 जनवरी , 1999 को कर्नाटक के देवनहल्ली में शिलान्यास कर स्वर्ण चतुर्भुज योजना की शुरुआत की थी।

इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना में देश के चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को सड़क मार्ग से जोड़ा जाना था।

तत्कालीन केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री के किरदार में भुवन चंद्र खंडूड़ी इस योजना के नायक थे। उन्होंने योजना पर शानदार तरीके से अमल किया था।

भाजपा आज भी इस परियोजना को अपनी बेहतरीन उपलब्धियों में से एक मानकर इसका बखान करती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed