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मोदी का चहेता है गुजरात में 'परदेसी'

Thu, 03 Apr 2014 06:31 PM IST
अहमदाबाद-ईस्ट से विजय त्रिपाठी
अहमदाबाद-ईस्ट से विजय त्रिपाठी Updated Thu, 03 Apr 2014 06:31 PM IST
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ground report from ahmdabad by vijay tripathi

गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के पक्ष में फिल्मी अंदाज में प्रचार करने, उन्हें गुजरात का शेर बताने व उनकी दहाड़ से कांग्रेसियों की धोती ढीली होने जैसे डायलॉग से शोहरत बटोरने वाले परेश रावल को बतौर बख्शीश मिला है अहमदाबाद ईस्ट से भाजपा का टिकट। लेकिन उन्हें यहां बाहरी होने के सवाल से जूझना पड़ रहा है।

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मुंबई में जन्मे परेश रावल यूं तो गुजराती हैं, लेकिन यहां उनकी सक्रियता पिछले चुनाव के समय ही ज्यादा रही है। खास बात यह है कि गुजरात में करीब तीन फीसदी ब्राह्मण हैं और इस समुदाय से परेश इकलौते भाजपा प्रत्याशी हैं।
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मोदी ने अपने चहेते को उतारा

ground report from ahmdabad by vijay tripathi

पिछली बार वडोदरा से बालकृष्ण शुक्ल भाजपा के टिकट पर जीते थे, लेकिन इस बार यहां से मोदी के लड़ने के कारण उनका पत्ता साफ हो गया है।

यहां एक तीर से मोदी ने दो निशाने साधे हैं। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के खासमखास व सात बार से यहां से लगातार संसदीय चुनाव जीत रहे हीरेन पाठक को ठिकाने लगाने के साथ-साथ ब्राह्मण की जगह अपने चहेते ब्राह्मण प्रत्याशी को उतारा है।

इससे पहले मोदी आडवाणी के प्रिय राजेंद्र सिंह राणा (संघ के भी अति चहेते) का भावनगर से टिकट काट चुके हैं। इसी तरह आडवाणी के एक और सिपहसालार डा. वल्लभ कठीरिया भी टिकट के लिए हाथ मलते रह गए।

हिम्मत ने हिम्मत नहीं हारी

ground report from ahmdabad by vijay tripathi

परेश रावल के मुकाबले अहमदाबाद ईस्ट सीट से कांग्रेस ने पूर्व मेयर हिम्मत सिंह पटेल को खड़ा किया है। सरनेम पटेल होने से उनके गुजरात के सबसे ताकतवर समुदाय से होने का भ्रम होता है लेकिन वे गैर गुजराती हैं।

इस सीट पर यूपी, बिहार, एमपी और राजस्थान के प्रवासी श्रमिकों की तादाद अच्छी खासी है, इसीलिए कांग्रेस ने हिम्मत सिंह को उतारा है। कांग्रेस के टिकट से महरूम रहे गैर गुजराती दावेदारों से हिम्मत सिंह को खतरा है, लेकिन हिम्मत ने हिम्मत नहीं हारी है।

उनका दावा है कि आखिर तक सब भाई अपनी ही मदद करेंगे। असल बाहरी तो परेश रावल हैं। वे यहां सिर्फ चुनाव जीतने आए हैं और जीत भी गए तो या तो मुंबई में दिखाई देंगे या फिर फिल्मों में।

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असंतोष नहीं दिखा

ground report from ahmdabad by vijay tripathi

परेश रावल ने अपने को और ज्यादा गुजराती साबित करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। अहमदाबाद ईस्ट में एक फ्लैट भी खरीद लिया है।

हीरेन पाठक का टिकट कटने पर समर्थकों ने काफी विरोध किया, बंद रखा और परेश रावल का पुतला भी फूंका, लेकिन अप्रत्याशित रूप से एक-दो दिन में ही यह असंतोष प्रकट रूप में नहीं दिखा।

अब अंदरखाने जरूर नाराजगी है जो ऐन चुनाव तक सामने आ भी सकती है। यूं तो परेश का मुकाबला हीरेन पाठक की लोकप्रियता से भी होगा। यहां के लोगों को यह अंदेशा भी है कि कहीं गुजराती परेश रावल भी जीत के बाद मुंबइया न बन जाएं।

मोदी पर फिल्म बना रहे परेश रावल

ground report from ahmdabad by vijay tripathi

अपने प्रोडक्शन हाउस की ओ माय गॉड के बाद परेश रावल अब मोदी पर केंद्रित फिल्म बना रहे हैं जिसमें मोदी के करिअर ग्राफ को फिल्मी मसाले के साथ परोसा जाएगा।

मशहूर निर्देशक केतन मेहता की फिल्म सरदार में सरदार वल्लभ भाई पटेल की भूमिका निभाने वाले परेश रावल ने अब वाकई राजनेता के तौर पर अपनी पारी शुरू कर दी है। इस फिल्म में अदाकारी के लिए उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी शोहरत मिली।

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