फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Green coal will now be produced from waste in Haridwar a plant will be set up at a cost of Rs 140 crore

Uttarakhand: कचरे के निस्तारण की भारी चुनौतियों के बीच अब हरिद्वार में कचरे से बनेगा हरित कोयला, लगेगा प्लांट

Sat, 08 Jun 2024 01:23 PM IST
रेनू सकलानी आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 08 Jun 2024 01:23 PM IST
सार

टीएचडीसी-यूजेवीएनएल संयुक्त उपक्रम ने हरिद्वार में हरित कोयला प्लांट लशुरुआत की कवायद शुरू की। इसके लिए नगर निगम हरिद्वार के साथ एमओयू साइन हो चुका है।

विज्ञापन
Green coal will now be produced from waste in Haridwar a plant will be set up at a cost of Rs 140 crore
कचरा

विस्तार

राज्य में रोजाना निकलने वाले कचरे के निस्तारण की भारी चुनौतियों के बीच अब हरिद्वार में इससे हरित कोयला बनाने का काम शुरू होने वाला है। इसके लिए टीएचडीसी-यूजेवीएनएल का संयुक्त उपक्रम हरिद्वार में 140 करोड़ रुपये की लागत से म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट टू टॉरीफाइड चारकोल (हरित कोयला) प्लांट लगाने जा रहा है।

विज्ञापन

एनटीपीसी ने वाराणसी में हरित कोयला प्लांट लगाया है। इस कांसेप्ट को देखते हुए टीएचडीसी-यूजेवीएनएल संयुक्त उपक्रम ने हरिद्वार में इसकी शुरुआत की कवायद शुरू की। इसके लिए नगर निगम हरिद्वार के साथ एमओयू साइन हो चुका है। रोजाना करीब 400 टन कचरे से 140 टन हरित कोयला तैयार होगा।

विज्ञापन

इस हरित कोयले का इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जा सकेगा। उद्योगों को भी बेचा जा सकेगा, जिसे वह ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगे। राज्य में इस तरह का यह पहला प्लांट होगा, जिससे कूड़े का निस्तारण आसान हो जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

वेस्ट टू एनर्जी प्लांट अब तक अधूरा

रुड़की में शहरी विकास विभाग ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने की योजना शुरू की थी। इस प्लांट का निर्माण एक दशक में भी पूरा नहीं हो पाया है। हालात ये हैं कि पिछले दिनों शहरी विकास मंत्री पूरे दल के साथ वेस्ट टू एनर्जी को जानने के लिए जर्मनी गए थे। उन्होंने लौटने के बाद वेस्ट टू एनर्जी की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन अभी तक इसमें कोई खास प्रगति नजर नहीं आ रही।

उत्तराखंड में सॉलिड वेस्ट सबसे बड़ी चुनौती

राज्य के शहरी क्षेत्रों से रोजाना निकलने वाला कचरा सबसे बड़ी चुनौती है। हालात ये हैं कि रोजाना करीब 1,600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसमें से अभी तक महज 60 फीसदी का निपटान हो पाता है। प्रदेशभर में लीगेसी वेस्ट के अंबार अभी भी लगे हुए हैं। हालांकि, शहरी विकास विभाग लगातार इसके निस्तारण का दावा कर रहा है।

ये भी पढ़ें...मासूम की आपबीती: बालश्रम करता पकड़ा गया 13 साल का बच्चा, मां को लेकर जो बात बताई-सुनकर पसीज जाएगा कलेगा

हरित कोयला प्लांट के लिए हमने हरिद्वार नगर निगम से एमओयू साइन कर लिया है। इसके लिए भूमि भी चिह्नित कर ली गई है। अब प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने की तैयारी है। रोजाना बड़ी मात्रा में कचरे से हरित कोयला तैयार हो सकेगा। -डॉ. संदीप सिंघल, प्रबंध निदेशक, यूजेवीएनएल


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed