{"_id":"81f59eab2f461ced9b31b3c5ebaa0d4c","slug":"government-school-in-chamoli","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ में खत्म हो रहे सरकारी स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ में खत्म हो रहे सरकारी स्कूल
विनय बहुगुणा/अमर उजाला, कर्णप्रयाग
Updated Tue, 01 Apr 2014 08:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से चमोली जिले में अभी तक 55 प्राथमिक और दो जूनियर हाईस्कूल कम छात्र संख्या के कारण बंद हो चुके हैं।
विज्ञापन
जोशीमठ ब्लाक में ही दिसंबर 2012 तक 25 और कर्णप्रयाग में 12 विद्यालयों पर ताले लटके हैं। सब बढ़े, सब पढ़ें से लेकर मिड-डे-मील आदि योजनाएं भी सरकारी स्कूलों के अस्तित्व को नहीं बचा पाई हैं।
निजी स्कूलों में पढ़ा रहे बच्चे
कर्णप्रयाग के स्वर्का गांव में 13 परिवारों के 28 लोग हैं। प्राथमिक स्कूल यहां वर्ष 2010 में बंद हो चुका है। जिन ग्रामीणों के बच्चे स्कूल जाते हैं वे उन्हें तीन किमी दूर लंगासू में निजी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। यही स्थिति श्रीतोली सहित जिले के अन्य उन गांवों की भी है, जहां प्राथमिक विद्यालय बंद हो गए हैं।
विज्ञापन
गांवों में नहीं जाते शिक्षक
र्स्वका निवासी राम प्रसाद मैखुरी और थराली के डा. रमेश पुरोहित का कहना है कि स्कूलों के बंद होने का कारण अधिकांश का सड़क से दूर होना है। गांव और स्कूलों में बिजली, पानी, संचार और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं होने से वहां तैनात शिक्षकों ने भी दिलचस्पी नहीं दिखाई।
विज्ञापन
ऐसे में सक्षम ग्रामीणों ने पाल्यों को निजी स्कूलों में भर्ती करना शुरू किया, जिससे ये विद्यालय छात्र संख्या का मानक पूरा नहीं कर पाए और बंद हो गए। निजी स्कूलों में सभी सुविधाओं के कारण भी सरकारी स्कूल बंद हुए हैं।
छात्र संख्या पर एक नजर
जनपद में संचालित हो रहे 975 प्राथमिक विद्यालयों में 24740 बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि 170 अशासकीय प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 13326 है।
औसतन प्रत्येक स्कूल में 78 बच्चे हैं, जबकि जिले में 150 से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 10 से 30 के बीच है, जो प्रत्येक सत्र में कम हो रही है।
इनका है कहना
प्राथमिक सरकारी स्कूलों के बंद होने के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण पढ़ाई का नहीं होना है। शिक्षकों कहते हैं कि उन्हें अतिरिक्त कार्य सौंपे गए हैं, जबकि ऐसा नहीं है।
-पुष्पा मानस, सेवानिवृत्त निदेशक विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखंड।