तीन लाख कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश से विभागों में कामकाज रहा ठप, जनता में हाहाकार
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उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के आह्वान पर प्रदेशभर के कर्मचारी बड़ी संख्या में बृहस्पतिवार को सामूहिक अवकाश पर रहे। 10 सूत्रीय मांग पत्र पर उन्होंने दफ्तरों में तालेबंदी की और जगह-जगह नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
राजधानी में यमुना कालोनी स्थिति लोनिवि और सिंचाई विभागों में सामूहिक अवकाश का असर दिखा। राज्य सचिवालय में सामूहिक अवकाश का आंदोलन विफल रहा। यहां बड़ी संख्या कर्मचारी सचिवालय पहुंचे और उन्होंने बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि उपस्थिति दर्ज कराने के बाद कर्मचारी अनुभागों से या तो बाहर रहे या फिर उन्होंने कामकाज नहीं किया।
सचिवालय सेवा अधिकारी संघ (राजपत्रित) ने सामूहिक अवकाश पर न जाने का पहले ही एलान कर दिया था। एटीएम गेट पर हुई आम सभा में सचिवालय संघ अध्यक्ष दीपक जोशी ने कर्मचारियों से सामूहिक अवकाश में सहयोग की अपील की। इस दौरान वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में सभी सचिवों की मौजूदगी में समन्वय समिति के पदाधिकारियों से 10 मांगों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद वित्त मंत्री ने बताया कि सभी मांगों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में विचार विमर्श हुआ।
उसके आधार पर समन्वय समिति से अनुरोध किया गया है कि आंदोलन को स्थगित करे। सभी विषय मंत्रिपरिषद के समक्ष रखे जाएंगे। समन्वय समिति के संयोजक दीपक जोशी ने कहा कि समिति की निगाहें कैबिनेट की बैठक पर रहेगी। बैठक में जिन मांगों पर सहमति बनी है, यदि कैबिनेट में उन पर निर्णय हुए तो उस आधार पर समिति आगे की रणनीति पर विचार करेगी। फिलहाल समिति ने अपने चरणबद्ध आंदोलन में कोई बदलाव नहीं किया है।
उधर, राजधानी में यमुना कालोनी स्थिति लोनिवि और सिंचाई विभागों में सामूहिक अवकाश का असर दिखा। कलेक्ट्रेट, कोषागार, विकास भवन, एमडीडीए, जलसंस्थान, राज्य वन विकास निगम समेत कई प्रमुख कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी नहीं पहुंचे। कर्मचारी परेड मैदान में एकत्रित हुए और सभा की। सभा को समन्वय समिति के संयोजक मंडल में शामिल नेताओं ने वित्त मंत्री से हुई वार्ता की जानकारी दी।
निजी वाहनों से सचिवालय पहुंचे अधिकारी
सचिवालय के कई अधिकारी बृहस्पतिवार को निजी वाहनों से सचिवालय पहुंचे। सचिवालय चालक संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में चालकों ने सरकारी वाहन नहीं चलाए।
8,10,16 फीसदी हो सकता है आवास भत्ता
वित्त मंत्री प्रकाश पंत से हुई वार्ता में जिन मांगों पर सहमति बनीं, उनमें आवास किराया भत्ता सबसे प्रमुख है। सरकार ने आवास भत्ते की दरें पांच, सात और नौ फीसदी तय की हैं, लेकिन कर्मचारी इसे केंद्रीय कर्मियों के समान देने की मांग कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट की बैठक में आवास भत्ते की दर को आठ, 10 और 16 फीसदी करने पर विचार हो सकता है।
इसके अलावा समन्वय समिति को एश्योर्ड कैरियर प्रमोशन (एसीपी) की पूर्व व्यवस्था को लागू करने और पदोन्नति में शिथिलीकरण नियमावली 2010 को यथावत रखने, स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता, अपराध अनुसंधान अभिसूचना भत्ता समेत कुछ और भत्तों को बहाल करने के भी संकेत दिए गए। तय हुआ कि सरकार आवास अनुरक्षण (मैनटेनेंस) शुल्क की दरों को चार गुना से घटाकर दोगुना किया जाएगा।
वार्ता में आवास भत्ता और एसीपी की मांगों को प्रमुखता से रखा गया है। बैठक का कार्यवृत्त जारी होगा। सभी विषय मंत्रिपरिषद के समक्ष रखे जाएंगे। मंत्रिपरिषद निर्णय लेगी। हम कर्मचारियों के हितों के पक्ष में होंगे। मेरा समन्वय समिति से आग्रह है कि वह कड़े रुख में नरमी बरते और आंदोलन स्थगित करे।
प्रकाश पंत, वित्त मंत्री
इन मांगों पर भी सकारात्मक संकेत
-उपनल कर्मियों के मानदेय में हर साल बढ़ोतरी। न्यायालय का फैसला आने के बाद बनेगी नियमितीकरण नियमावली
-निगम कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियों की भांति देय सुविधा के जारी होंगे शासनादेश
-2005 से पूर्व जिन निगमों में पेंशन की व्यवस्था थी, वहां पेंशन देने पर विचार किया जाएगा
-ऊर्जा विभाग में 8,16, 26 साल में प्रमोशन की पूर्व व्यवस्था लागू करने पर होगा विचार
-शिक्षकों के एसीपी को लेकर समन्वय समिति चयन वेतनमान के संबंध में प्रस्ताव देगी
बैठक में 10 सूत्रीय मांग पत्र पर चर्चा हुई। आश्वासन दिया गया है कि शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में मांगों का प्रस्ताव रखा जाएगा। वार्ता के कार्यवृत्त (मिनट्स) की भाषा के आधार पर समन्वय समिति आंदोलन के संबंध में निर्णय लेगी। फिलहाल आंदोलन यथावत रहेगा।
- दीपक जोशी, संयोजक, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति