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IIT और MBBS के दिखाए सपने रह गए अधूरे
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 23 Dec 2015 03:13 PM IST
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देहरादून के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी बच्चों को जिला प्रशासन आईआईटी और एमबीबीएस के सपने दिखाकर भूल गया।
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जरूरतमंद बच्चों के चयन के नाम पर दो बार लिखित परीक्षाएं कराई गई, लेकिन उन्हें इसकी तैयारी न कराकर गरीबों के सपनों से खिलवाड़ किया जा रहा है। बच्चे अब भी इस परीक्षा से आस लगाए हैं, लेकिन शिक्षा विभाग और प्रशासन बच्चों से किए वायदों को भूल गए।
बता दें कि तत्कालीन जिलाधिकारी वीवीआरसी पुरुषोत्तम और शिक्षा विभाग की पहल पर जरूरतमंद बच्चों को अच्छे संस्थानों से इंजीनियरिंग और मेडिकल की कोचिंग कराने की योजना थी। इसके लिए फरवरी 2014 में प्रत्येक सरकारी स्कूल से दो प्रतिभावान गरीब छात्रों को चुना गया।
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इसके बाद इनकी दोबारा परीक्षा ली गई। तब जिला प्रशासन ने दावा किया था कि कोटा राजस्थान में इन्हें कोचिंग दिलाई जाएगी। कोचिंग लेने के ये बच्चे भी भविष्य में डॉक्टर और इंजीनियर बन सकेंगे। चयनित हुए छात्र अब तक कोचिंग जाने की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन विभाग इन छात्रों से किए गए वादे को भूल गया।
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मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी खाली से इस बार में पूछने पर वह बताते हैं कि इस तरह की योजना बनी थी, लेकिन इस पर क्या प्रगति हुई इसकी जानकारी नहीं है।
ऐसे लटका मामला
दून के तत्कालीन जिलाधिकारी का कहना था कि शुरुआत में सौ बच्चों को वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराएंगे, इन बच्चों को मार्च 2014 तक चयनित कर लिया जाएगा, लेकिन उनके प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जाते ही मामला लटक गया।
प्रशासन सहयोग के लिए आगे आया तो मैने भी सोचा कि भविष्य में डॉक्टर बन सकूंगी, मन लगाकर परीक्षा दी, पहले स्कूल में काउंसलिंग हुई, इसके बाद लिखित परीक्षा दी, लेकिन रिजल्ट नहीं आया।
- पूर्णिमा भट्ट, छात्रा इंटरमीडिएट राजीव गांधी नवोदय विद्यालय
प्रशासन के मदद के लिए हाथ बढ़ाने से इंजीनियरिंग करने की उम्मीद बंधी, लेकिन जो रोल नंबर मिला उसे देखने पर यह इनवैलिड बता रहा है।
- राजीव राय, छात्र इंटर नवोदय विद्यालय
जिला प्रशासन ने अच्छी पहल की थी, कई बच्चे ऐसे हैं जो मेधावी हैं, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते अपनी प्रतिभा का उचित प्लेटफार्म पर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे।
- केपी भट्ट, शिक्षक
परीक्षाओं के बाद ऐसा लगा कि बच्चों को सहयोग मिलेगा और यह बच्चे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकेंगे, लेकिन परीक्षाओं के बाद इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
- आरपी बमोला, प्रधानाचार्य राजीव गांधी नवोदय विद्यालय