Dehradun: निजी स्कूलों की मनमानी नहीं रोक पाई सरकार, लुट रहे अभिभावक, ड्राफ्ट से आगे नहीं बढ़ पाया फीस एक्ट
महंगी किताबों पर रोक लगाई जा सके इसके लिए सरकार की ओर से फीस एक्ट बनाने का दावा किया गया था। पहले पूर्ववर्ती कांग्रेस और फिर भाजपा सरकार में इसके लिए समय-समय पर निर्देश जारी हुए। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार में इसका ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया था।
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प्रदेश में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, ड्रेस और महंगी किताबों की मनमानी सरकार नहीं रोक पाई है। इसके लिए पहले फीस एक्ट बनाने का दावा हुआ फिर राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण बनाने का शासनादेश हुआ, लेकिन इससे आगे बात नहीं बढ़ पाई है। यही वजह है कि हर साल की तरह इस साल भी लाखों अभिभावक पांच से दस हजार रुपये के किताब के सेट और स्कूल फीस के नाम पर सिस्टम की मार झेल रहे हैं।
प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी फीस और निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर रोक लगाई जा सके इसके लिए सरकार की ओर से फीस एक्ट बनाने का दावा किया गया था। पहले पूर्ववर्ती कांग्रेस और फिर भाजपा सरकार में इसके लिए समय-समय पर निर्देश जारी हुए। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार में इसका ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया था।
तत्कालीन शिक्षा सचिव एमसी जोशी की ओर से खासी मशक्कत के बाद फीस एक्ट का ड्राफ्ट बनकर तैयार हुआ, लेकिन इसका प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं आ पाया। इसके बाद भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार में नए सिरे से फीस एक्ट बनाने का दावा हुआ। इसमें देरी पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कई बार नाराजगी जताई, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बाद में राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण बनाने का शासनादेश हुआ।
केंद्र सरकार के नियमों का इंतजार
वर्ष 2022 में इसके शासनादेश के बाद इसके लिए नियम बनना था। एससीईआरटी को इसकी जिम्मेदारी दी गई, लेकिन प्राधिकरण का न ढांचा बना न कोई नियम नहीं बन पाया। शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी के मुताबिक राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण के तहत नियम और ढांचे के लिए विभाग को केंद्र सरकार के नियमों का इंतजार है।
सरकार अपने स्कूलों में किताबें उपलब्ध नहीं करा पाई है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते। बाजार में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध न होने और कागज का दाम महंगा होने से किताबों के दाम बढ़े है, स्कूल यह दाम तय नहीं करते। - प्रेम कश्यप, अध्यक्ष प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव एसोसिएशन
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प्रदेश में पहले फीस एक्ट बनाने के दावे हुए पर इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। सरकार राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण का ढांचा व नियम बनाए या फिर कुछ अन्य राज्यों की तरह फीस रेगुलेशन कमेटी बनाकर मनमानी पर रोक लगाए। - आरिफ खान, अध्यक्ष अभिभावक एसोसिएशन