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Dehradun News: आयुर्वेदिक चिकित्सक के भरोसे चल रहा एलोपैथिक अस्पताल
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10 साल से खाली है चिकित्सक और फार्मासिस्ट का पद
इमरजेंसी में मरीजों को सीएचसी साहिया का करना पड़ता है रुख
राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय बिरमऊ एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में पिछले एक दशक से एलोपैथिक चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो पाई है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी सप्ताह में तीन दिन के लिए लगाई गई है।
इमरजेंसी में मरीजों को तत्काल राहत के लिए एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से उपचार की जरूरत होती है। यही कारण है मजबूरी में मरीजों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहिया का रुख करना पड़ रहा है।
वर्ष 2006 में करीब डेढ़ हजार की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए बिरमऊ गांव में करोड़ों की लागत से राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय का निर्माण किया गया था। करीब 10 वर्ष से अस्पताल में एलोपैथिक चिकित्सक और फार्मासिस्ट का पद खाली चल रहा है। एक दशक पहले अस्पताल के भवन के एक कक्ष में आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र भी खोला गया था। तब से अब तक आयुर्वेदिक चिकित्सक के भरोसे ही पूरा अस्पताल चल रहा है।
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काफी लंबे समय से ग्रामीण अस्पताल में एलोपैथिक चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तैनाती की मांग कर रहे हैं। 20 जुलाई से अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन फार्मासिस्ट की वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। आयुर्वेदिक चिकित्सक एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से उपचार कर नहीं सकते हैं। फार्मासिस्ट केवल तीन दिन अस्पताल आ रहे हैं। इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों के लिए सीएचसी सहिया में उपचार के लिए जाना एक मात्र विकल्प है।
चिकित्सक के लिए डिमांड भेजी गई हैं। चिकित्सक उपलब्ध होते ही अस्पताल में तैनाती कर दी जाएगी। फिलहाल सप्ताह में तीन दिन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर फार्मासिस्ट की ड्यूटी लगाई गई है।
- डॉ. विक्रम सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी, साहिया
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इमरजेंसी में मरीजों को सीएचसी साहिया का करना पड़ता है रुख
राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय बिरमऊ एक आयुर्वेदिक चिकित्सक के भरोसे चल रहा है। अस्पताल में पिछले एक दशक से एलोपैथिक चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो पाई है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी सप्ताह में तीन दिन के लिए लगाई गई है।
इमरजेंसी में मरीजों को तत्काल राहत के लिए एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से उपचार की जरूरत होती है। यही कारण है मजबूरी में मरीजों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहिया का रुख करना पड़ रहा है।
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वर्ष 2006 में करीब डेढ़ हजार की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए बिरमऊ गांव में करोड़ों की लागत से राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय का निर्माण किया गया था। करीब 10 वर्ष से अस्पताल में एलोपैथिक चिकित्सक और फार्मासिस्ट का पद खाली चल रहा है। एक दशक पहले अस्पताल के भवन के एक कक्ष में आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र भी खोला गया था। तब से अब तक आयुर्वेदिक चिकित्सक के भरोसे ही पूरा अस्पताल चल रहा है।
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काफी लंबे समय से ग्रामीण अस्पताल में एलोपैथिक चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तैनाती की मांग कर रहे हैं। 20 जुलाई से अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन फार्मासिस्ट की वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। आयुर्वेदिक चिकित्सक एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से उपचार कर नहीं सकते हैं। फार्मासिस्ट केवल तीन दिन अस्पताल आ रहे हैं। इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों के लिए सीएचसी सहिया में उपचार के लिए जाना एक मात्र विकल्प है।
चिकित्सक के लिए डिमांड भेजी गई हैं। चिकित्सक उपलब्ध होते ही अस्पताल में तैनाती कर दी जाएगी। फिलहाल सप्ताह में तीन दिन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर फार्मासिस्ट की ड्यूटी लगाई गई है।
- डॉ. विक्रम सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी, साहिया