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अजी अब काम कहां...
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 24 Feb 2014 03:51 PM IST
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पहले सुनारों के पास बहुत काम था, अजी अब काम कहां? एक दुकान पर बैठे कुछ विक्रेता यही चर्चा कर रहे थे।
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वे उस जमाने को याद कर रहे थे जबकि एक ही दिन में एक ज्वेलर की दुकान से एक लाख तक की बिक्री हो जाती थी।
दुकान बंद है यह दिखाने के लिए समय से पहले ही बाहर कंबल लगा दिया जाता था और तब अंदर बैठकर शाम तक का हिसाब किया जाता था।
जब भी कोई आता तो कंबल के भीतर दुकान से कहना पड़ता था कि अब दुकान बंद है जी कल आना। लेकिन अब देर तक कस्टमर का वेट ही करते रहते हैं।
पहले के मुकाबले सिर्फ बीस प्रतिशत बिक्री रह गई है, कुछ इसी तरह वह लोग आपस में चिंता जताते नजर आए।