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अब बड़ा अफसर हूं तब भी नहीं डरते
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 26 Nov 2013 05:10 PM IST
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एडीएम (प्रशासन) के दफ्तर में कर्नल साहब फाइल लिए बैठे थे।
साहब के चेहरे का रंग बदला
इसी वक्त चैंबर के पीछे से जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे सुनाई देने लगे। नारों की आवाज जैसे-जैसे तेज हो रही थी एडीएम साहब के चेहरे का रंग बदल रहा था। वह धीमे से बुदबुदाए-‘ऐसे कैसे चलेगा उत्तराखंड?’ कर्नल साहब ने सुन लिया।
बोले-‘बिना डंडा के कोई नहीं डरता। मैं पंजाब में एसआई था। लोग कांपते थे। अब उससे बड़ा अफसर हूं, लेकिन कोई नहीं डरता।’ फिर गहरी सांस खींची और खामोश हो गए।
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साहब के चेहरे का रंग बदला
इसी वक्त चैंबर के पीछे से जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे सुनाई देने लगे। नारों की आवाज जैसे-जैसे तेज हो रही थी एडीएम साहब के चेहरे का रंग बदल रहा था। वह धीमे से बुदबुदाए-‘ऐसे कैसे चलेगा उत्तराखंड?’ कर्नल साहब ने सुन लिया।
बोले-‘बिना डंडा के कोई नहीं डरता। मैं पंजाब में एसआई था। लोग कांपते थे। अब उससे बड़ा अफसर हूं, लेकिन कोई नहीं डरता।’ फिर गहरी सांस खींची और खामोश हो गए।
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