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निगम की 'डुगडुगी' पर सरकार का पीपीपी 'राग'
अमर उजाला, अंशुल डांगी, देहरादून
Updated Fri, 30 Aug 2013 06:01 PM IST
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लैंसडौन में जीएमवीएन गेस्ट हाउस को पीपीपी मोड़ में दिए जाने को लेकर अब निगम सरकार को घेरने का मन बना चुका है। निगम ने सरकार के फैसले पर सवालिया निशान लगाते हुए विशेष पैकेज की मांग कर डाली है।
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गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउसों को पीपीडी मोड में दिए जाने का कर्मी विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में निगम ने लैंसडौन स्थित गेस्ट हाउस को पीपीपी मोड में देने के विरोध में सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
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साथ ही सरकार से निगम को घाटे से उबारने के लिए विशेष पैकेज दिए जाने की मांग भी की गई है। जीएमवीएन कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में निगम के अध्यक्ष दिनेश धनै ने कहा कि आपदा में निगम को 70 करोड़ का नुकसान हुआ है।
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निगम की संपत्ति को लगा धक्का
इसमें 40 करोड़ की परिसंपत्तियों और 30 करोड़ के व्यवसाय का घाटा हुआ है। उन्होंने कहा कि निगम के 8 गेस्ट हाउस पूरी तरह खत्म हो गए, जबकि 20 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं।
कर्मियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि निगम को घाटे से उबारने के बजाए सरकार गेस्ट हाउसों को पीपीडी मोड में देने की योजना बना रही है। उन्होंने सरकार से निगम को घाटे से उबारने के लिए खनन और शराब का कार्य भी निगम को देने की मांग की है।
खनन से होता है लाभ
कर्मियों ने कहा कि मई 2001 से जनवरी 2013 तक निगम ने खनन से 174.45 करोड़ रुपये का लाभ कमाया। जिसमें से 86.05 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को दिया गया। जबकि निगम ने 88.40 करोड़ रुपये कमाए।
उन्होंने बताया कि निगम कर्मचारियों को जून महीने का वेतन दे चुका है, लेकिन जुलाई महीने में सिर्फ कार्य कर रहे लोगों को ही वेतन दिया जा सका है। जबकि अगस्त का वेतन देना मुश्किल हो रहा है।
निगम ने मांगा विशेष पैकेज
इसके लिए उन्होंने सरकार से विशेष पैकेज मांगा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास, मुख्यमंत्री सचिवालय और सचिवालय में चल रही कैंटीनों में कार्यरत जीएमवीएन के कर्मचारियों को बीते 13 सालों में निगम 8 करोड़ रुपए सेलरी में दे चुका है।
मगर सरकार ने अभी तक उसका भुगतान नहीं किया है, जिसके भुगतान की मांग की गई है, ताकि घाटे से निगम को उबारा जा सके।