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Dehradun News: अलग-अलग कचरा देना आदत में करना होगा शुमार, तभी हो पाएगा स्वच्छता में सुधार
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I- दून में पचास प्रतिशत लोग भी नहीं देते हैं सूखा, गीला कचरा अलग-अलग
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I- कुछ सोसायटी ने शुरू भी किया है इस पर काम, अन्य सोसायटी को दिए निर्देश
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I दूनवासी सूखा और गीला कचरा अलग-अलग देने में परहेज कर रहे है। कुछ एक सोसायटी के अलावा अधिकांश सोसायटी और घरों से अभी भी सूखा और गीला कचरा एक साथ आ रहा है। निगम ने इसको लेकर सख्ती भी दिखाई और सोसायटी पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान भी किया, लेकिन इसके बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जब तक लोग इसे अपनी आदत में शुमार नहीं करते, तब तक न तो स्वच्छता और न ही रैंकिंग में सुधार होगा।
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Iदरअसल, साल 2015 से पहले इंदौर के लोग भी देश के बाकी हिस्सों की तरह रंग के आधार पर डस्टबिन में कचरा अलग करके डालने की बात को नहीं मानते थे। इसके बाद इंदौर नगर निगम ने एक डस्टबिन रहित शहर के मॉडल को अपनाया। इसके बाद डोर-टु-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था को मजबूत किया और घर-घर से कूड़ा उठाना शुरू किया। जब एक बार लोगों को ये आदत लग गई तो नगर निगम ने लोगों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करके देने के लिए कहा। लेकिन दून नगर निगम की विडंबना यह है कि निगम अभी तक डोर-टु-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था को मजबूत नहीं कर पाया और कूड़ा इधर-उधर फेंकने के बजाय कूड़ा वाहनों में देने की आदत नहीं डलवा पाया।
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Iनिगम के आंकड़ों पर ही गौर करें तो दून में कुल घरों, प्रतिष्ठानों, दुकानों, स्कूलों की संख्या एक लाख 91 हजार 427 हैं। अभी इनमें से 56हजार घरों प्रतिष्ठानों से कूड़ा अलग-अलग कर दिया जा रहा है। एक लाख 25 हजार 403 घर, प्रतिष्ठान, सोसायटी ऐसे हैं, जो अभी भी कूड़े को अलग-अलग नहीं दे रहे हैं। ऐसा नहीं है, निगम ने इसके लिए प्रयास नहीं किया। निगम के वाहनों में गीला, सूखा कचरा अलग-अलग देने की व्यवस्था है। दून के तमाम सोसायटी की कई बार बैठक कर उन्हें अलग-अलग कूड़ा देने के लिए प्रेरित किया। यहां तक सोयायटी पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान भी किया गया। इसके बाद भी कुछ एक सोसायटी और घरों के अलावा अधिकांश लोग सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग नहीं दे रहे।
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Iसोसायटियों को अलग-अलग कूड़ा देने के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर उन्हें पूरा प्लान नगर निगम में जमा करने को कहा गया है। कुछ सोसायटी ने बाकायदा इस पर अमल करना भी शुरू कर दिया है। हालांकि अभी भी अधिकांश सोयायटी, घर, प्रतिष्ठान निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उनके खिलाफ अब उचित कार्रवाई की जाएगी। -मनुज गोयल, नगर आयुक्त देहरादून
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Iस्वच्छता का सीधा संबंध स्वास्थ्य से, स्वच्छ रहें, स्वस्थ रहे - डीएम सोनिका
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Iस्वच्छता का मतलब सिर्फ अपने घर की सफाई से नहीं है। हम जिस सोसायटी, कस्बे या शहर में रहते हैं, उसको साफ रखने की हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। सरकारी संस्थाओं के लाख प्रयास के बाद भी अभी जनभागीदारी के स्तर पर वह प्रयास नहीं हो पा रहे हैं, जिसकी जरूरत है। स्वच्छता का सीधा संबंध स्वास्थ्य से है। अगर हमें स्वस्थ रहना है तो हमें स्वच्छता के लिए प्रयास करना होगा। दूनवासियों से अपील है कि वह दून को स्वच्छ और सुंदर बनाने में सरकारी संस्थाओं की ओर से किए जा रहे प्रयासों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।I
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I- कुछ सोसायटी ने शुरू भी किया है इस पर काम, अन्य सोसायटी को दिए निर्देश
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I दूनवासी सूखा और गीला कचरा अलग-अलग देने में परहेज कर रहे है। कुछ एक सोसायटी के अलावा अधिकांश सोसायटी और घरों से अभी भी सूखा और गीला कचरा एक साथ आ रहा है। निगम ने इसको लेकर सख्ती भी दिखाई और सोसायटी पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान भी किया, लेकिन इसके बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जब तक लोग इसे अपनी आदत में शुमार नहीं करते, तब तक न तो स्वच्छता और न ही रैंकिंग में सुधार होगा।
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Iदरअसल, साल 2015 से पहले इंदौर के लोग भी देश के बाकी हिस्सों की तरह रंग के आधार पर डस्टबिन में कचरा अलग करके डालने की बात को नहीं मानते थे। इसके बाद इंदौर नगर निगम ने एक डस्टबिन रहित शहर के मॉडल को अपनाया। इसके बाद डोर-टु-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था को मजबूत किया और घर-घर से कूड़ा उठाना शुरू किया। जब एक बार लोगों को ये आदत लग गई तो नगर निगम ने लोगों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करके देने के लिए कहा। लेकिन दून नगर निगम की विडंबना यह है कि निगम अभी तक डोर-टु-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था को मजबूत नहीं कर पाया और कूड़ा इधर-उधर फेंकने के बजाय कूड़ा वाहनों में देने की आदत नहीं डलवा पाया।
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Iनिगम के आंकड़ों पर ही गौर करें तो दून में कुल घरों, प्रतिष्ठानों, दुकानों, स्कूलों की संख्या एक लाख 91 हजार 427 हैं। अभी इनमें से 56हजार घरों प्रतिष्ठानों से कूड़ा अलग-अलग कर दिया जा रहा है। एक लाख 25 हजार 403 घर, प्रतिष्ठान, सोसायटी ऐसे हैं, जो अभी भी कूड़े को अलग-अलग नहीं दे रहे हैं। ऐसा नहीं है, निगम ने इसके लिए प्रयास नहीं किया। निगम के वाहनों में गीला, सूखा कचरा अलग-अलग देने की व्यवस्था है। दून के तमाम सोसायटी की कई बार बैठक कर उन्हें अलग-अलग कूड़ा देने के लिए प्रेरित किया। यहां तक सोयायटी पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान भी किया गया। इसके बाद भी कुछ एक सोसायटी और घरों के अलावा अधिकांश लोग सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग नहीं दे रहे।
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Iसोसायटियों को अलग-अलग कूड़ा देने के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर उन्हें पूरा प्लान नगर निगम में जमा करने को कहा गया है। कुछ सोसायटी ने बाकायदा इस पर अमल करना भी शुरू कर दिया है। हालांकि अभी भी अधिकांश सोयायटी, घर, प्रतिष्ठान निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उनके खिलाफ अब उचित कार्रवाई की जाएगी। -मनुज गोयल, नगर आयुक्त देहरादून
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Iस्वच्छता का सीधा संबंध स्वास्थ्य से, स्वच्छ रहें, स्वस्थ रहे - डीएम सोनिका
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Iस्वच्छता का मतलब सिर्फ अपने घर की सफाई से नहीं है। हम जिस सोसायटी, कस्बे या शहर में रहते हैं, उसको साफ रखने की हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। सरकारी संस्थाओं के लाख प्रयास के बाद भी अभी जनभागीदारी के स्तर पर वह प्रयास नहीं हो पा रहे हैं, जिसकी जरूरत है। स्वच्छता का सीधा संबंध स्वास्थ्य से है। अगर हमें स्वस्थ रहना है तो हमें स्वच्छता के लिए प्रयास करना होगा। दूनवासियों से अपील है कि वह दून को स्वच्छ और सुंदर बनाने में सरकारी संस्थाओं की ओर से किए जा रहे प्रयासों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।I