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जार्ज आईवान ग्रेगरी मैन बने उत्तराखंड विधानसभा के एंग्लो इंडियन सदस्य
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 29 Apr 2017 09:50 PM IST
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Anglo-Indian
- फोटो : amarujala
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प्रचंड बहुमत वाली भाजपा सरकार ने विधानसभा में देहरादून के जार्ज आईवान ग्रेगरी मैन को सदस्य मनोनीत किया है। जार्ज को आंग्ल-भारतीय(एंग्लो इंडियन) समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर सदस्य बनाया गया है।
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प्रदेश में सरकार बन जाने के दिन से ही सियासी हवाओं में सवाल तैर रहा था कि क्या सरकार विस में एंग्लो इंडियन सदस्य का मनोनयन करेगी। देश के कई राज्यों में एंग्लो इंडियन के मनोनयन की परंपरा नहीं है। शनिवार को अपर सचिव विधायी भारतभूषण पांडेय ने जार्ज आईवान के मनोनयन की अधिसूचना जारी कर दी है। जार्ज डालनवाला क्षेत्र में निवास करते हैं और कारमैन स्कूल में प्राचार्य हैं।
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मनोनयन के बाद वह भाजपा कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का आभार प्रकट किया। प्रदेश अध्यक्ष ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें मनोननय की बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे एंग्लो इंडियन समुदाय के हितों के लिए काम करेंगे।
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देहरादून में पले-बढ़े
जार्ज आईवान ग्रेगरी मैन देहरादून में पले-बढ़े। दिल्ली सेंट स्टीफन कॉलेज से उन्होंने बीए किया। डीएवी पीजी कॉलेज से उन्होंने स्नातकोत्तर की उपाधि ली। इसके बाद वह अध्यापन कार्य से जुड़ गए।
ताकि मजबूत हो जादुई आंकड़ा
एनडी तिवारी ने शुरू की परंपरा
पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की सरकार के समय से आंग्ल भारतीय को प्रतिनिधित्व देने की परंपरा चली आ रही है। वर्ष 2002 में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत तो मिला था। मगर उसका संख्या बल 36 के जादुई आंकडे पर सिमट गया था। विधानसभा में संख्या बल को बढ़ाने के लिए तत्कालीन सरकार ने आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि का मनोनयन किया। हालांकि भाजपा नेता अजेन्द्र अजय ने एक जनहित याचिका के जरिये सरकार के इस कदम को अदालत में चुनौती दी। लेकिन, बहुमत के संकट में फंसी खंडूड़ी सरकार के समय याचिका वापस ले ली गई।
ताकि मजबूत हो जादुई आंकड़ा
दरअसल, संविधान में आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि को भी निर्वाचित सदस्यों की तरह सदन में वोट देने का अधिकार है। वर्ष 2007 में भाजपा सत्तारुढ़ हुई तो वह बहुमत के आंकड़े से दो दो कदम दूर थी। 34 की संख्या को जादुई आंकड़े में बदलने के लिए यूकेडी व निर्दलीय सदस्यों का साथ लेने के अलावा आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि का मनोनयन किया गया। वर्ष 2012 में कांग्रेस 32 सीटों पर अटकी तो उसने एक बार फिर आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि को मनोनीत किया।
प्रचंड बहुमत में उम्मीद कम थी
भाजपा 57 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई। बहुमत के मामले में वह सर्वाधिक सहज स्थिति में है। इन हालातों में उस पर आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि के मनोनयन का कोई सियासी दबाव नहीं था। वित्तीय संकट के हो रहे प्रलाप के बीच ये भी समझा रहा था कि शायद सरकार इस बार एंग्लो इंडियन के मनोनयन से परहेज करेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की सरकार के समय से आंग्ल भारतीय को प्रतिनिधित्व देने की परंपरा चली आ रही है। वर्ष 2002 में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत तो मिला था। मगर उसका संख्या बल 36 के जादुई आंकडे पर सिमट गया था। विधानसभा में संख्या बल को बढ़ाने के लिए तत्कालीन सरकार ने आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि का मनोनयन किया। हालांकि भाजपा नेता अजेन्द्र अजय ने एक जनहित याचिका के जरिये सरकार के इस कदम को अदालत में चुनौती दी। लेकिन, बहुमत के संकट में फंसी खंडूड़ी सरकार के समय याचिका वापस ले ली गई।
ताकि मजबूत हो जादुई आंकड़ा
दरअसल, संविधान में आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि को भी निर्वाचित सदस्यों की तरह सदन में वोट देने का अधिकार है। वर्ष 2007 में भाजपा सत्तारुढ़ हुई तो वह बहुमत के आंकड़े से दो दो कदम दूर थी। 34 की संख्या को जादुई आंकड़े में बदलने के लिए यूकेडी व निर्दलीय सदस्यों का साथ लेने के अलावा आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि का मनोनयन किया गया। वर्ष 2012 में कांग्रेस 32 सीटों पर अटकी तो उसने एक बार फिर आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि को मनोनीत किया।
प्रचंड बहुमत में उम्मीद कम थी
भाजपा 57 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई। बहुमत के मामले में वह सर्वाधिक सहज स्थिति में है। इन हालातों में उस पर आंग्ल भारतीय समुदाय के प्रतिनिधि के मनोनयन का कोई सियासी दबाव नहीं था। वित्तीय संकट के हो रहे प्रलाप के बीच ये भी समझा रहा था कि शायद सरकार इस बार एंग्लो इंडियन के मनोनयन से परहेज करेगी।