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सिस्टम की मार झेल रहे उत्तराखंड के 22 गो सदन
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:28 PM IST
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गाय
- फोटो : Getty
प्रदेश के 5000 गो वंश वाले 22 गो सदन सिस्टम की मार झेल रहे हैं। स्थिति यह है कि चारे के लिए प्रति गाय 60 रुपये हर रोज का खर्चा आता है पर इस मद में सरकार की ओर से निर्धारित डेढ़ रुपया भी समय पर गो सदनों को नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2016 की भरण पोषण मद की धनराशि अब तक गो सदनों को नहीं मिल पाई है।
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प्रदेश में गो वंश के भरण पोषण के नाम पर पहले ही बहुत कम धनराशि दी जा रही है, प्रति गाय चारे पर 60 रुपये से अधिक खर्च आने के बावजूद सरकार की ओर से इस मद में लगभग डेढ़ रुपया प्रति गाय दिया जा रहा है, लेकिन वह भी गो सदनों तक समय पर नहीं मिल पा रहा है।
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स्थिति यह है कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में पशु प्रेमियों और स्वयं सहायता समूहों की ओर से स्थापित 5000 गो वंश वाले 22 गो सदन सरकार से मिलने वाली सहायता के लिए वर्ष 2017 में वर्ष 2016 के प्रस्तावित बजट का इंतजार कर रहे हैं। उन गो सदनों में उन गो वंश को रखा गया है जो निराश्रित, बीमार और अनुत्पादक हैं या फिर गो तस्करी में पकड़े गए केस प्रोपर्टी के रूप में गो सदनों में हैं।
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पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत प्रति गो वंश भरण पोषण के लिए 200 रुपये तय किया है, लेकिन मिलता दो रुपया भी नहीं, जो मिल रहा है उसके लिए भी गो सदनों को तरसना पड़ रहा है, सरकार एवं पशुपालन विभाग को अनुपयोगी पशुओं की देखभाल के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
- गौरी मौलखी, सलाहकार केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री
गो सदनों के लिए भरण पोषण मद में 40 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, मुझे बताया गया है कि शासन ने मंगलवार को 32 लाख रुपये जारी कर दिए, वही आठ लाख रुपये गोबर गैस प्लांट के लिए प्रस्तावित थे उस पर आपत्ति लगाई गई है।
- डा.एसएस बिष्ट निदेशक पशुपालन