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गढ़वाली से ऐसा प्यार कि छोड़ आई बॉलीवुड
अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Sun, 05 Oct 2014 10:16 PM IST
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उत्तराखंड की जानी-मानी लोक गायिका संगीता ढौंडियाल ने हिंदी फिल्मों में गायकी के बजाय गढ़वाली बोली-भाषा के प्रचार में ही संघर्षरत रहने का निर्णय लिया है।
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यहां आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने आईं संगीता ढौंडियाल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि कुछ हिंदी फिल्मों के निर्माता-निर्देशकों ने उन्हें हिंदी फिल्मों में काम करने का ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने इसके लिए साफ मना कर दिया।
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विरासत को आगे ले जाना लक्ष्य
ढौंडियाल ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति और कला को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना उनका सपना है, इसके लिए ताउम्र संघर्ष करती रहूंगी। उत्तराखंड के गांवों में कई प्रतिभाएं छिपी हुई हैं, उन्हें तराशने की जरूरत है। आने वाली पीढ़ी को गढ़वाली भाषा के प्रचार के लिए जागरूक करने का काम किया जाएगा।
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पर्यटन स्थलों का हो संरक्षण
उन्होंने कहा कि गढ़वाल सभा की ओर से जगह-जगह गायकी के क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोगों का चयन किया जा रहा था, तो वर्ष 1994 में वह भी पहली बार मंच पर गढ़वाली गाना गाने पहुंची, उनका सिलेक्शन हुआ और तब से निरंतर गढ़वाली गानें गा रही हैं।
संगीता ढौंडियाल ने कहा कि गढ़वाली फिल्मों के निर्माण के लिए राज्य में कई पर्यटन स्थल हैं, उनके संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।