{"_id":"53cc09c3e2055038e1368a458d142ef9","slug":"garbage-scam-in-dehradun","type":"story","status":"publish","title_hn":"दून में चल रहा था कूड़ेदान घोटाले का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दून में चल रहा था कूड़ेदान घोटाले का खेल
Updated Fri, 24 Jan 2014 11:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कूड़ेदान के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद कांग्रेसी पार्षदों ने नए बजट का प्रस्ताव बनाया और मुख्य नगर अधिकारी से पास भी करवा लिया। प्रस्ताव जब मेयर के पास पहुंचा तो हकीकत सामने आ गई।
विज्ञापन
मेयर ने इस पर जांच बिठा दी है। वहीं, भाजपा पार्षदों ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे घोटाला करार दिया।
पर्याप्त बजट मिलता है
भाजपा पार्षदों ने बताया कि शहर की सफाई व्यवस्था के लिए डीवीडब्ल्यूएम कंपनी है। इसे बजट जेएनएनयूआरएम से मिलता है। 13 वें वित्त आयोग से भी करोड़ों रुपए जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद निगम स्तर पर कूड़ेदान खरीदने की क्या जरूरत पड़ी।
विज्ञापन
कमीशन था फिक्स
पार्षद भूपेंद्र कठैत ने बताया कुछ कांग्रेसी पार्षदों का कूड़ेदान खरीद में कमीशन फिक्स था। उन्होंने 55 जगहों पर कूड़ेदान की जरूरत बताते हुए प्रस्ताव बनाया और मुख्य नगर अधिकारी से दस्तखत करा लिए। मेयर के पास गोलमाल पकड़ लिया गया।
विज्ञापन
कंबल खरीद में भी घोटाले का आरोप
वरिष्ठ भाजपा पार्षद सुशील गुप्ता ने बताया कुछ कांग्रेसी पार्षद निगम अफसरों से मिलकर गोलमाल कर रहे हैं। भाजपा पार्षदों के अनुसार, कंबल खरीद में घोटाले की बू आ रही है।
पार्षदों के अनुसार कंबल कितने और कहां से आए। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं। जांच हो तो कई घोटाले सामने आ सकते हैं। इस मौके पर पार्षद कमली भट्ट, अरुण खन्ना, पूर्व पार्षद जीवन सिंह भी मौजूद रहे।
वरिष्ठ कांग्रेसी पार्षद ने भी खोल दी पोल
कूड़ेदान के प्रस्ताव में वरिष्ठ कांग्रेसी पार्षद विनय कोहली के भी हस्ताक्षर हैं। मगर गुरुवार को पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनसे फर्जी ढंग से हस्ताक्षर कराए गए। कोहली के मुताबिक उन्हें आम प्रस्ताव बताकर दस्तखत लिए गए। असलियत पता चलने पर विरोध भी जताया।
कोहली ने कहा कि मैंने नेता प्रतिपक्ष को दो टूक कहा कि यह काम डीवीडब्ल्यूएम कंपनी का है। हम क्यों खरीदवा रहे हैं, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी।
प्रस्ताव मेरे पास आया था। वह नियमों के खिलाफ था, इसलिए खारिज कर दिया गया।
-विनोद चमोली, मेयर