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कानून तो तमाम, फिर भी राम तेरी गंगा मैली

Fri, 21 Feb 2014 09:56 PM IST
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 21 Feb 2014 09:56 PM IST
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ganga preservation plan

गंगा संरक्षण के लिए बेशक नया कानून बनाने की चर्चा हो रही हो लेकिन इस बाबत पुराने कई नियम-कानून हैं जिनका कड़ाई से पालन हो तो गंगा मैली होने से बच जाए।

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दुर्भाग्य से नियमों का पालन कराने वाली टीम कहीं नहीं है। गंगा का दोहन करने वाली टीमें बहुत हैं। यही कारण है कि कानूनों के रहते हुए भी गंगा लगातार मटमैली होती चली जा रही है।
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अब भारत सरकार के कानून कब बनेंगे और उनका कितना असर होगा, इसका पता आने वाले वक्त में ही चल पाएगा।

1935 में लागू हुआ था विशेष बायलॉज

ganga preservation plan

गंगा रक्षा के लिए बहुतरे कानून हैं। वर्ष 1935 में तत्कालीन ह‌र‌िद्वार नगरपालिका द्वारा विशेष बायलाज पारित किया गया था, जो आज तक लागू है।

बायलाज में इन चीजों की मनाही

  • गंगा की ओर परनाला खोलना
  • गंगा की ओर प्लेटफार्मों पर दुकान खोलना
  • गंगा में कपड़े धोना अथवा साबुन लगाना

1935 से पूर्व भी थे धार्मिक प्रतिबंध
  • स्नान करते वक्त गंगा में पहले पांव रखना निषिद्ध
  • अंजुली में जल लेकर पहले शिखा पर डालना
  • गंगा में दातुन अथवा कुल्ला करने की मनाही

क्या कहते हैं गंगा के रखवाले

ganga preservation plan

गंगा सभा के स्वयंसेवक हरकी पैड़ी क्षेत्र में गंगा तटों की रक्षा करते हैं। गंगा के लिए बने नियमों का पालन इस पूरे क्षेत्र में कराया जाता है। जहां तक शेष गंगा का सवाल है उसके लिए यदि कोई रक्षक टीम बने तो गंगा सभा सहयोग प्रदान कर सकती है। अलबत्ता, संस्था के लिए पूरे गंगा क्षेत्र में नियमों का पालन कराना अकेले संभव नही हैं।
-वीरेंद्र श्रीकुंज, महामंत्री गंगा सभा।

गंगा सुरक्षा के लिए बल गठित हो
यदि उत्तराखंड सरकार अलग से बजट निर्धारित करे तो गंगा तटों की रक्षा और बायलाज के पालन के लिए अलग से टीम खड़ी की जा सकती है। नगर निगम ऐसी व्यवस्था कम से कम हरिद्वार पंचपुरी क्षेत्र में तो कर ही सकता है। आवश्यकता धन की है जो नही हैं। गंगा तटों पर नियमों का पालन कराने के लिए भारत सरकार के स्तर पर सुरक्षा बल का गठन होना चाहिए।
-मनोज गर्ग, मेयर नगर निगम।

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